औषधि / भेषज सूक्त (अथर्ववेद परम्परा) वैदिक मंत्र
ॐ आप इद्वा उ भेषजीरापो अमीवचातनीः । आपः सर्वस्य भेषजीस्तास्ते कृण्वन्तु भेषजम् ॥
जल-चिकित्सा (Hydrotherapy) द्वारा शरीर के विषैले तत्त्वों का शमन, कीटाणुओं का नाश एवं आन्तरिक अंगों की शुद्धि।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
जल-चिकित्सा (Hydrotherapy) द्वारा शरीर के विषैले तत्त्वों का शमन, कीटाणुओं का नाश एवं आन्तरिक अंगों की शुद्धि।
इस मंत्र से क्या होगा?
जल-चिकित्सा (Hydrotherapy) द्वारा शरीर के विषैले तत्त्वों का शमन, कीटाणुओं का नाश एवं आन्तरिक अंगों की शुद्धि
जाप विधि
अस्वस्थ अवस्था में पीने के जल को हाथ में लेकर ३ बार इस मंत्र का उच्चारण कर उस अभिमंत्रित जल का पान करें।
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