औषधि / भेषज सूक्त (अथर्ववेद परम्परा) वैदिक मंत्र
ॐ आप इद्वा उ भेषजीरापो अमीवचातनीः । आपः सर्वस्य भेषजीस्तास्ते कृण्वन्तु भेषजम् ॥
जल-चिकित्सा (Hydrotherapy) द्वारा शरीर के विषैले तत्त्वों का शमन, कीटाणुओं का नाश एवं आन्तरिक अंगों की शुद्धि।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
जल-चिकित्सा (Hydrotherapy) द्वारा शरीर के विषैले तत्त्वों का शमन, कीटाणुओं का नाश एवं आन्तरिक अंगों की शुद्धि।
इस मंत्र से क्या होगा?
जल-चिकित्सा (Hydrotherapy) द्वारा शरीर के विषैले तत्त्वों का शमन, कीटाणुओं का नाश एवं आन्तरिक अंगों की शुद्धि
जाप विधि
अस्वस्थ अवस्था में पीने के जल को हाथ में लेकर ३ बार इस मंत्र का उच्चारण कर उस अभिमंत्रित जल का पान करें।
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ॐ ह्रीं स्त्रीं हुं फट् ॥
naam mantraकपीश
bhakti mantraउग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम्
kaamya mantraॐ ह्रीं योगिनि योगिनि योगेश्वरि योग भयङ्करि सकल स्थावर जङ्गमस्य मुख हृदयं मम वशं आकर्षय आकर्षय नमः।
navgrah mantraॐ उद्बुध्यस्वाग्ने प्रति जागृहि त्वमिष्टापूर्ते सं सृजेथामयं च। अस्मिन्त्सधस्थे अध्युत्तरस्मिन् विश्वे देवा यजमानश्च सीदत।।
mool mantraॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मये नमः