उद्देश्य अनुसार मंत्र
संज्ञान / संगठन सूक्त (१०.१९१.४)
संज्ञान / संगठन सूक्त (१०.१९१.४) वैदिक मंत्र
ॐ समानी व आकूतिः समाना हृदयानि वः । समानमस्तु वो मनो यथा वः सुसहासति ॥
मन, हृदय और संकल्पों में पूर्ण एकरूपता की स्थापना, विरोधों का नाश एवं परस्पर प्रेम की वृद्धि।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारवैदिक मंत्र
प्रयोजन
यह मंत्र क्यों?
मन, हृदय और संकल्पों में पूर्ण एकरूपता की स्थापना, विरोधों का नाश एवं परस्पर प्रेम की वृद्धि।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
मन, हृदय और संकल्पों में पूर्ण एकरूपता की स्थापना, विरोधों का नाश एवं परस्पर प्रेम की वृद्धि
जाप विधि
पारिवारिक प्रार्थना या सामूहिक सत्संग के अंत में शांति-पाठ के साथ विनियोग, हाथ जोड़कर सस्वर पाठ।
विशेष टिप्पणियाँ
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