संज्ञान / संगठन सूक्त (१०.१९१.४) वैदिक मंत्र
ॐ समानी व आकूतिः समाना हृदयानि वः । समानमस्तु वो मनो यथा वः सुसहासति ॥
मन, हृदय और संकल्पों में पूर्ण एकरूपता की स्थापना, विरोधों का नाश एवं परस्पर प्रेम की वृद्धि।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
मन, हृदय और संकल्पों में पूर्ण एकरूपता की स्थापना, विरोधों का नाश एवं परस्पर प्रेम की वृद्धि।
इस मंत्र से क्या होगा?
मन, हृदय और संकल्पों में पूर्ण एकरूपता की स्थापना, विरोधों का नाश एवं परस्पर प्रेम की वृद्धि
जाप विधि
पारिवारिक प्रार्थना या सामूहिक सत्संग के अंत में शांति-पाठ के साथ विनियोग, हाथ जोड़कर सस्वर पाठ।
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राजीवलोचन
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sabar mantraभैरव शिव का चेला जहां जहां-जहां जाऊं नगर डगर लगे वहां फिर मेला शिव का धुना गोरख तापे काल कंटक थर थर कांपे मेरी रक्षा करें नवनाथ रामदूत हनुमंत रिद्धि सिद्धि आंगन विराजे माई अन्नपूर्णा सुखवंत शब्द सांचा पिंड काचा चलो मंत्र ईश्वर वाचा ओम गुरु जी गोरख जति मच्छिंद्र का चेला शिव के रूप में दिखे अलबेला कानों कुंडल गले में नादी हाथ त्रिशूल नाथ है आदि अलख पुरुष को करूं आदेश जन्म जन्म के काटो कलेश भगवा वेश हाथ में खप्पर भैरव शिव का चेला जहां जहां जाऊं नगर डगर लगे वहां फिर मेला शिव का धुना गोरख तापे काल कंटक थर थर कांपे मेरी रक्षा करें नवनाथ रामदूत हनुमंत रिद्धि सिद्धि आंगन विराजे माई अन्नपूर्णा सुखवंत शब्द सांचा पिंड कांचा चलो मंत्र ईश्वर वाचा 2
beej mantraधूं
dhyan mantraगुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुर्गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुरेव परंब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः॥
gyan mantraसरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि । विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा ॥