शनि देव / दशरथ कृत शनि स्तोत्र स्तोत्र मंत्र
नम: कृष्णाय नीलाय शितिकण्ठनिभाय च। नमो घोराय रौद्राय भीषणाय कपालिने॥ तपसा दग्धदेहाय नित्यं योगरताय च । 43
शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या से मुक्ति, बाधाओं का नाश, अटके कार्यों में सफलता और सुख-शांति की प्राप्ति 37।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या से मुक्ति, बाधाओं का नाश, अटके कार्यों में सफलता और सुख-शांति की प्राप्ति 37।
इस मंत्र से क्या होगा?
शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या से मुक्ति, बाधाओं का नाश, अटके कार्यों में सफलता और सुख-शांति की प्राप्ति
जाप विधि
शनिवार को सात्विक भाव से काले आसन पर बैठकर, शनिदेव की मूर्ति के समक्ष सरसों के तेल का दीपक जलाकर स्पष्ट उच्चारण के साथ पाठ करें 37।
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ नमः शिवाय
dhyan mantraध्यायेन्नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं चारुचंद्रावतंसं रत्नाकल्पोज्ज्वलांगं परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम्। पद्मासीनं समंतात्स्थितममरगणैर्व्याघ्रकृत्तिं वसानं विश्वाद्यं विश्वबीजं निखिलभयहरं पंचवक्त्रं त्रिनेत्रम्॥
vaidik mantraॐ भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवा भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः । स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवांसस्तनूभिर्व्यशेमहि देवहितं यदायुः ॥
beej mantraग्रौं
navgrah mantraऐं ह्सौः श्रीं द्रां कं ग्रहाधिपतये भौमाय स्वाहा॥
kaamya mantraप्रणतानां प्रसीद त्वं देवि विश्वार्तिहारिणि। त्रैलोक्यवासिनामीड्ये लोकानां वरदा भव॥