ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
नवग्रह / नवग्रह स्तोत्र (व्यास कृत)

नवग्रह / नवग्रह स्तोत्र (व्यास कृत) स्तोत्र मंत्र

सौम्यं सौम्यगुणोपेतं तं बुधं प्रणमाम्यहम् ॥ 35

सभी ग्रहों की शांति, ग्रह दोषों का शमन, चोर व अग्नि भय से मुक्ति, और जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति 35।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

जप काउंटर लोड हो रहा है...

प्रकारस्तोत्र मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

सभी ग्रहों की शांति, ग्रह दोषों का शमन, चोर व अग्नि भय से मुक्ति, और जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति 35।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

सभी ग्रहों की शांति, ग्रह दोषों का शमन, चोर व अग्नि भय से मुक्ति, और जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति

जाप विधि

आचमन में जल लेकर नवग्रह मंडल का आवाहन करते हुए श्रद्धापूर्वक पाठ करें। अंत में 'अनया पूजया सूर्यादि नवग्रहा प्रियंताम्' कहकर जल छोड़ें 36।

विशेष टिप्पणियाँ

इसे भी पढ़ें

अलग-अलग श्रेणियों से

हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें

kavach mantra

सकलायुध सम्पूर्ण निखिलाङ्ग सुदर्शन यदम कवच दिव्यम परमानंद दायिनं सौदर्शन यो सदा शुद्ध पठे नरह तस्या सिद्धि विपुला करस्था भवति ध्रुवं कोष्माण्ड चण्ड भूता ये दुष्टा ग्रहा स्मृता पलायन्ते निशंभीता वर्मनोस्य प्रभावतः कुष्ठा पस्मा गुलमा व्याध कर्म हेतुका नश्य तन मंत्रिता भूपाना सप्त दिनावधी अनेन मन्त्रिता मृतानां तुलसी मूल संस्थितां ललाटे तिलकं कृत्वा मोहये त्रिजगन्नरः। 17

mool mantra

ॐ बुद्धाय नमः

beej mantra

ब्रीं

shanti mantra

ॐ स्वस्ति प्रजाभ्यः परिपालयन्तां न्यायेन मार्गेण महीं महीशाः । गोब्राह्मणेभ्यः शुभमस्तु नित्यं लोकाः समस्ताः सुखिनो भवन्तु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

jap mantra

अंजनीगर्भित संभूत कपूर रामप्रिय नमस्तुभ्यं हनुमं रक्ष सर्वदा

naam mantra

भार्गवी