ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
दक्षिणा काली तांत्रिक

दक्षिणा काली तांत्रिक तांत्रिक मंत्र

ॐ क्रीं क्रीं क्रीं ॐ ह्रीं ह्रीं हूं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा

अष्ट सिद्धि की प्राप्ति, भूत-प्रेत तथा अघोर बाधा निवारण, सांसारिक बंधनों से मुक्ति, तथा साधक के भीतर के क्रोध, काम और अहंकार का पूर्ण विनाश 8।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारतांत्रिक मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

अष्ट सिद्धि की प्राप्ति, भूत-प्रेत तथा अघोर बाधा निवारण, सांसारिक बंधनों से मुक्ति, तथा साधक के भीतर के क्रोध, काम और अहंकार का पूर्ण विनाश 8।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

अष्ट सिद्धि की प्राप्ति, भूत-प्रेत तथा अघोर बाधा निवारण, सांसारिक बंधनों से मुक्ति, तथा साधक के भीतर के क्रोध, काम और अहंकार का पूर्ण विनाश

जाप विधि

गुरु दीक्षा के उपरांत ही इस बाईस अक्षरी (Bais Akshari) मंत्र का जप अनुमत है। यह साधना रात्रि काल में स्फटिक या रुद्राक्ष की माला से की जाती है। एक कालखंड में न्यूनतम 11 माला का जप आवश्यक है। साधक का मुख उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। जप पूर्ण होने के पश्चात् आम की समिधा पर लौंग, काले तिल और गुग्गुल के मिश्रण से दशांश हवन करना अनिवार्य है। हवन की भस्म (विभूति) को सुरक्षित रखा जाता है 14।

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