नवग्रह / नवग्रह स्तोत्र स्तोत्र मंत्र
ताः सर्वाःप्रशमं यान्ति व्यासोब्रूते न संशयः ॥ 35
सभी ग्रहों की शांति, ग्रह दोषों का शमन, चोर व अग्नि भय से मुक्ति, और जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति 35।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
सभी ग्रहों की शांति, ग्रह दोषों का शमन, चोर व अग्नि भय से मुक्ति, और जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति 35।
इस मंत्र से क्या होगा?
सभी ग्रहों की शांति, ग्रह दोषों का शमन, चोर व अग्नि भय से मुक्ति, और जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति
जाप विधि
आचमन में जल लेकर नवग्रह मंडल का आवाहन करते हुए श्रद्धापूर्वक पाठ करें। अंत में 'अनया पूजया सूर्यादि नवग्रहा प्रियंताम्' कहकर जल छोड़ें 36।
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
मुरारी
dhyan mantraगुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुर्गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुरेव परंब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः॥
mool mantraॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने प्रणतः क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः
tantrik mantraॐ नमो महा पाशुपतास्त्राय स्मरण मात्रेण प्रकटय प्रकटय शीघ्रं आगच्छ आगच्छ मम सर्व शत्रु सैन्यं विध्वंसय विध्वंसय मारय मारय हुं फट्
vaidik mantraॐ परोऽपेहि मनस्पाप किमशस्तानि शंससि । परेहि न त्वा कामये वृक्षान् वनानि सं चर गृहेषु गोषु मे मनः ॥
jap mantraॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्यु मृत्युं नमाम्यहम्॥