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उद्देश्य अनुसार मंत्र
नवग्रह / नवग्रह स्तोत्र

नवग्रह / नवग्रह स्तोत्र स्तोत्र मंत्र

सिंहिकागर्भसंभूतं तं राहुं प्रणमाम्यहम् ॥ 35

सभी ग्रहों की शांति, ग्रह दोषों का शमन, चोर व अग्नि भय से मुक्ति, और जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति 35।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारस्तोत्र मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

सभी ग्रहों की शांति, ग्रह दोषों का शमन, चोर व अग्नि भय से मुक्ति, और जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति 35।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

सभी ग्रहों की शांति, ग्रह दोषों का शमन, चोर व अग्नि भय से मुक्ति, और जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति

जाप विधि

आचमन में जल लेकर नवग्रह मंडल का आवाहन करते हुए श्रद्धापूर्वक पाठ करें। अंत में 'अनया पूजया सूर्यादि नवग्रहा प्रियंताम्' कहकर जल छोड़ें 36।

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