भगवान विष्णु / गजेन्द्र मोक्ष स्तोत्र स्तोत्र मंत्र
यस्मिन्निदं यतश्चेदं येनेदं य इदं स्वयं । योस्मात्परस्माच्च परस्तं प्रपद्ये स्वयम्भुवम ॥ 4
कलियुग के समस्त पापों का नाश, दुःस्वप्न निवारण, जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति और श्रेय की प्राप्ति 4।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
कलियुग के समस्त पापों का नाश, दुःस्वप्न निवारण, जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति और श्रेय की प्राप्ति 4।
इस मंत्र से क्या होगा?
कलियुग के समस्त पापों का नाश, दुःस्वप्न निवारण, जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति और श्रेय की प्राप्ति
जाप विधि
हृदय में बुद्धि और ध्यान को एकाग्र करके इस स्तोत्र का प्रतिदिन पाठ करें 4।
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ॐ कं कामवशितायै नमः स्वाहा ।
kavach mantraक्रीं कालिकायै स्वाहा मम नाभिं सदावतु ॥ ह्रीं कालिकायै स्वाहा मम पृष्ठं सदावतु । रक्तबीजविनाशिन्यै स्वाहा हस्तौ सदावतु ॥ नीलुत्वल दलश्यामा शत्रु संघ विदारणी नरमुंड तथा खगम कमलम च वरम तथा निर्भयाम रक्त बदनाम दस्ताली घोर रूपणी शवासनताम काली मुंडमाला विभूषिताम सर्वाङ्गं पातु मे देवी सर्व संपत् करे शुभे सर्व देव स्तु ते देवी कालिके तवाम नमाम यहम 23
jap mantraॐ क्लीं कृष्णाय गोविन्दाय गोपीजनवल्लभाय पराय परमपुरुषाय परमात्मने परकर्ममन्त्रयन्त्रौषधास्त्रशस्त्राणि संहर संहर मृत्योर्मोचय मोचय ॐ नमो भगवते महासुदर्शनाय दीप्त्रे ज्वालापरीताय सर्वदिक्षोभणकराय हुँ फट् ब्रह्मणे परंज्योतिषे स्वाहा
beej mantraक्रीं
dhyan mantraकस्तूरीतिलकं ललाटपटले वक्षःस्थले कौस्तुभं नासाग्रे नवमौक्तिकं करतले वेणुं करे कङ्कणम्। सर्वाङ्गे हरिचन्दनं सुललितं कण्ठे च मुक्तावलिं गोपस्त्रीपरिवेष्टितो विजयते गोपालचूडामणिः॥
ugra mantraॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं असितांग भैरवाय नमः