भगवान श्रीकृष्ण / अच्युताष्टकम् स्तोत्र मंत्र
कुंचितै: कुन्तलैर्भ्राजमानाननं रत्नमौलिं लसत्कुण्डलं गण्डयो:। हारकेयूरकं कंकणप्रोज्ज्वलं किंकिणीमंजुलं श्यामलं तं भजे।। 9
श्री हरि भगवान का वशीकरण, प्रभु कृपा की प्राप्ति, भक्ति और भीतरी सुंदरता का विकास 8।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
श्री हरि भगवान का वशीकरण, प्रभु कृपा की प्राप्ति, भक्ति और भीतरी सुंदरता का विकास 8।
इस मंत्र से क्या होगा?
श्री हरि भगवान का वशीकरण, प्रभु कृपा की प्राप्ति, भक्ति और भीतरी सुंदरता का विकास
जाप विधि
भगवान श्रीकृष्ण के निमित्त प्रतिदिन प्रेम और श्रद्धापूर्वक इस अष्टक का पाठ करें। जन्माष्टमी पर विशेष पाठ लाभदायी है 8।
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ॐ श्रीं गं सौभाग्य गणपतये। वरवर्दा सर्वजन्म में वशमान्यै नमः
ugra mantraॐ क्रीं हूं क्रीं सर्व शत्रु स्तंभिनी घोर कालिकायै फट्
navgrah mantraॐ सों सोमाय नमः
dhyan mantraया कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना। या ब्रह्माच्युतशङ्करप्रभृतिभिर्देवैः सदा पूजिता सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥
shanti mantraॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः । सर्वे सन्तु निरामयाः । सर्वे भद्राणि पश्यन्तु । मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत् ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
jap mantraॐ सह नाववतु। सह नौ भुनक्तु। सह वीर्यं करवावहै। तेजस्वि नावधीतमस्तु मा विद्विषावहै। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥