भगवान हयग्रीव (हंस गायत्री स्वरूप) ज्ञान मंत्र
ॐ वागीश्वराय विद्महे हयग्रीवाय धीमहि तन्नो हंसः प्रचोदयात् ॥
बौद्धिक जड़ता का निवारण, वाक्-सिद्धि और उच्च शिक्षा में सफलता 18।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
बौद्धिक जड़ता का निवारण, वाक्-सिद्धि और उच्च शिक्षा में सफलता 18।
इस मंत्र से क्या होगा?
बौद्धिक जड़ता का निवारण, वाक्-सिद्धि और उच्च शिक्षा में सफलता
जाप विधि
प्रातःकाल संध्यावंदन के समय नित्य जप 18।
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ओम नमो आदेश गुरु को कामरूप कामाख्या माई अपनी शक्ति से अमुक मेरी इच्छा पूरी करो ना करो तो ईश्वर महादेव की दुहाई 19
dhyan mantraकस्तूरीतिलकं ललाटपटले वक्षःस्थले कौस्तुभं नासाग्रे नवमौक्तिकं करतले वेणुं करे कङ्कणम्। सर्वाङ्गे हरिचन्दनं सुललितं कण्ठे च मुक्तावलिं गोपस्त्रीपरिवेष्टितो विजयते गोपालचूडामणिः॥
beej mantraक्रां
kavach mantraनासां वैवस्वत: पातु मुखं मे भास्कर: सदा । नाभिं गृहपति: पातु मन्द: पातु कटिं तथा । पदौ मन्दगति: पातु सर्वांग पातु पिप्पल: । आंगो पांगानी सर्वानी रक्षे में सूर्य नंदन इत्तेत कवच देव पठे सूर्य सुतस्य यह नतस्य जायते पीडा प्रीतो भवति सूर्य जह व्यय जन्म द्वितीय मृत्यु स्थान गतो पिवा कलस्थो गतो वापी सुप्रीतु सदाशनी अष्टमस्थे सूर्यसुते व्यये जन्म द्वितीयगे। कवचं पठते नित्यं न पीडा जायते क्वचित्। इत्य तत कवचम दिव्यम सौरे निर्मित पुरा जन्म लग्न स्थिता दोषा सर्वान नाश्यते प्रभु इति शनि कवच संपूर्णं ॥ 20
kaamya mantraॐ ऐं महासरस्वत्यै नमः।
mool mantraॐ ऐं सरस्वत्यै नमः