भगवान हयग्रीव (वेदमय वागीश्वर स्वरूप) ज्ञान मंत्र
उद्गीथ प्रणवोद्गीत सर्व वागीश्वरेश्वर । सर्व वेदमया चिन्त्यः सर्वं बोधय बोधय ॥
वेदों, उपनिषदों और गूढ़ शास्त्रों का मर्म समझने की आत्मिक क्षमता (Enlightenment) प्राप्त करना 15।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
वेदों, उपनिषदों और गूढ़ शास्त्रों का मर्म समझने की आत्मिक क्षमता (Enlightenment) प्राप्त करना 15।
इस मंत्र से क्या होगा?
वेदों, उपनिषदों और गूढ़ शास्त्रों का मर्म समझने की आत्मिक क्षमता (Enlightenment) प्राप्त करना
जाप विधि
शास्त्रों के गंभीर अध्ययन तथा गूढ़ ज्ञानार्जन से पूर्व जप 15।
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ॐ नमो विपरीत-प्रत्यंगिरायै सहस्त्रानेक-कार्य-लोचनायै कोटि-विद्युज्जिह्वायै महा-व्याव्यापिन्यै संहार-रुपायै जन्म-शान्ति-कारिण्यै। मम स-परिवारकस्य भावि-भूत-भवच्छत्रून् स-दाराऽपत्यान् संहारय संहारय, महा-प्रभावं दर्शय दर्शय, हिलि हिलि, किलि किलि, मिलि मिलि, चिलि चिलि, भूरि भूरि, विद्युज्जिह्वे, ज्वल ज्वल, प्रज्वल प्रज्वल, ध्वंसय ध्वंसय, प्रध्वंसय प्रध्वंसय, ग्रासय ग्रासय, पिब पिब, नाशय नाशय, त्रासय त्रासय, वित्रासय वित्रासय, मारय मारय, विमारय विमारय, भ्रामय भ्रामय, विभ्रामय विभ्रामय, द्रावय द्रावय, विद्रावय विद्रावय हूं हूं फट् स्वाहा।।
siddh mantraॐ ऐं वाग्देव्यै विद्महे कामराजाय धीमहि । तन्नो देवी प्रचोदयात्॥
stotra mantraमामुग्रधर्मादखिलात् प्रमादान्नारायणः पातु नरश्च हासात्। दत्तस्त्वयोगादथ योगनाथः पायाद् गुणेशः कपिलः कर्मबन्धात्।। 7
vaidik mantraॐ त्वमग्ने यज्ञानां होता विश्वेषां हितः । देवेभिर्मानुषे जने ॥
naam mantraशशांक
shanti mantraॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्माऽमृतं गमय ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥