भगवान हयग्रीव (वेदमय वागीश्वर स्वरूप) ज्ञान मंत्र
उद्गीथ प्रणवोद्गीत सर्व वागीश्वरेश्वर । सर्व वेदमया चिन्त्यः सर्वं बोधय बोधय ॥
वेदों, उपनिषदों और गूढ़ शास्त्रों का मर्म समझने की आत्मिक क्षमता (Enlightenment) प्राप्त करना 15।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
वेदों, उपनिषदों और गूढ़ शास्त्रों का मर्म समझने की आत्मिक क्षमता (Enlightenment) प्राप्त करना 15।
इस मंत्र से क्या होगा?
वेदों, उपनिषदों और गूढ़ शास्त्रों का मर्म समझने की आत्मिक क्षमता (Enlightenment) प्राप्त करना
जाप विधि
शास्त्रों के गंभीर अध्ययन तथा गूढ़ ज्ञानार्जन से पूर्व जप 15।
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
श्रीं
navgrah mantraॐ चित्रवर्णाय विद्महे सर्परूपाय धीमहि तन्नः केतुः प्रचोदयात्।
dhyan mantraया कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना। या ब्रह्माच्युतशङ्करप्रभृतिभिर्देवैः सदा पूजिता सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥
kavach mantraक्रीं कालिकायै स्वाहा मम नाभिं सदावतु ॥ ह्रीं कालिकायै स्वाहा मम पृष्ठं सदावतु । रक्तबीजविनाशिन्यै स्वाहा हस्तौ सदावतु ॥ नीलुत्वल दलश्यामा शत्रु संघ विदारणी नरमुंड तथा खगम कमलम च वरम तथा निर्भयाम रक्त बदनाम दस्ताली घोर रूपणी शवासनताम काली मुंडमाला विभूषिताम सर्वाङ्गं पातु मे देवी सर्व संपत् करे शुभे सर्व देव स्तु ते देवी कालिके तवाम नमाम यहम 23
jap mantraॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः
ugra mantraॐ स्त्रीं आं अक्षोभ्य स्वाहा