गुरु गोरखनाथ मोहिनी एवं वशीकरण शाबर मंत्र
गुरु गोरखनाथ की दुहाई, फूल चढ़े तो वह मोहे। शब्द सांचा, पीर मेरा पावना 13
इसका मुख्य और सटीक प्रयोजन सम्मोहन, वशीकरण और किसी विशिष्ट व्यक्ति (जिससे संबंध विच्छेद हो गए हों या जो साधक से विमुख हो गया हो) के हृदय में साधक के प्रति अगाध प्रेम, सहानुभूति और आकर्षण उत्पन्न करना
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
इसका मुख्य और सटीक प्रयोजन सम्मोहन, वशीकरण और किसी विशिष्ट व्यक्ति (जिससे संबंध विच्छेद हो गए हों या जो साधक से विमुख हो गया हो) के हृदय में साधक के प्रति अगाध प्रेम, सहानुभूति और आकर्षण उत्पन्न करना है 13। यह मंत्र किसी को अमानवीय रूप से या बलपूर्वक नियंत्रित करने के बजाय लक्षित व्यक्ति की बुद्धि और भावनाओं (मोहे) को गुरु गोरखनाथ की सूक्ष्म और सौम्य ऊर्जा के माध्यम से परिवर्तित कर देता है। इसके प्रभाव से व्यक्ति के मन में बैठे हुए पारस्परिक विरोध शांत होते हैं, कड़वाहट मिटती है, और एक अत्यंत मधुर सौहार्द तथा वशीकरण की स्थापना होती है 13।
इस मंत्र से क्या होगा?
इसका मुख्य और सटीक प्रयोजन सम्मोहन, वशीकरण और किसी विशिष्ट व्यक्ति (जिससे संबंध विच्छेद हो गए हों या जो साधक से विमुख हो गया हो) के हृदय में साधक के प्रति अगाध प्रेम, सहानुभूति और आकर्षण उत्पन्न करना है 13
यह मंत्र किसी को अमानवीय रूप से या बलपूर्वक नियंत्रित करने के बजाय लक्षित व्यक्ति की बुद्धि और भावनाओं (मोहे) को गुरु गोरखनाथ की सूक्ष्म और सौम्य ऊर्जा के माध्यम से परिवर्तित कर देता है
इसके प्रभाव से व्यक्ति के मन में बैठे हुए पारस्परिक विरोध शांत होते हैं, कड़वाहट मिटती है, और एक अत्यंत मधुर सौहार्द तथा वशीकरण की स्थापना होती है
जाप विधि
नाथ परंपरा के इस सौम्य किंतु अत्यंत अचूक प्रभावकारी वशीकरण मंत्र की सिद्धि विशेष रूप से शुक्रवार के दिन (जो शुक्र और काम-ऊर्जा का दिन है) प्रारंभ की जाती है 13। साधक को शुद्ध होकर, स्वच्छ और सुगंधित वस्त्र धारण कर, किसी ताजे पुष्प (विशेषकर लाल गुलाब या सफेद चमेली) को अपने दाहिने हाथ में लेकर इस मंत्र का 21 बार अत्यंत एकाग्रता से जप करना होता है 13। जप के समय उस व्यक्ति का स्पष्ट और सजीव मानसिक चित्र साधक के मस्तिष्क में होना चाहिए जिसे वशीभूत करना है; यह मानसिक चित्र ही ऊर्जा के लिए 'टारगेट कॉर्डिनेट' का कार्य करता है। मंत्र सिद्ध होने के पश्चात, यदि वह अभिमंत्रित पुष्प लक्षित व्यक्ति को किसी भी प्रकार भेंट कर दिया जाए (या उसे सुंघा दिया जाए), या यह मंत्र लक्षित व्यक्ति के सम्मुख जाकर पूर्ण एकाग्रता से (मानसिक रूप से) पढ़ा जाए, तो ऊर्जा का तत्काल और अतीन्द्रिय संप्रेषण होता है 13।
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