श्री गणेश जप मंत्र
ॐ श्रीं गं गणपतये नमः
समृद्धि और विघ्नों के एक साथ शमन हेतु। 57
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
समृद्धि और विघ्नों के एक साथ शमन हेतु। 57
इस मंत्र से क्या होगा?
समृद्धि और विघ्नों के एक साथ शमन हेतु
जाप विधि
१०८ बार नित्य जप। 57
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ॐ अक्षय श्री छिन्नमस्ता देवी जगत निवासनी अदृश्य सिद्धि शून्य गमन विजयै मम सिद्धि देहि देहि प्राण देहि देहि मम अमुक गौत्र अमुक शर्मा ह गुरूत्वाकर्षण शक्ति नाशय शून्य सिद्धि प्राप्तर्थं शक्ति स्याद विनियोग
mool mantraॐ नृं नृं नृं नरसिंहाय नमः
gyan mantraॐ ऐं सरस्वत्यै नमः ॐ ॥
kaamya mantraॐ देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते। देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः॥
kavach mantraऊरू रघूत्तमः पातु रक्षःकुलविनाशकृत्। जानुनी सेतुकृत् पातु जङ्घे दशमुखान्तकः। पादौ विभीषणश्रीदः पातु रामोऽखिलं वपुः। एतां रामबलोपेतां रक्षां यः सुकृती पठेत्। स चिरायुः सुखी पुत्री विजयी विनयी भवेत्। पातालभूतलव्योम- चारिणश्छद्मचारिणः। न द्रष्टुमपि शक्तास्ते रक्षितं रामनामभिः। रामेति रामभद्रेति रामचन्द्रेति वा स्मरन्। नरो न लिप्यते पापैर्भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति। जगज्जैत्रैकमन्त्रेण रामनाम्नाभिरक्षितम्। यः कण्ठे धारयेत्तस्य करस्थाः सर्वसिद्धयः। वज्रपञ्जरनामेदं यो रामकवचं स्मरेत्। अव्याहताज्ञः सर्वत्र लभते जयमङ्गलम्। 34
beej mantraत्व्म्श्रीः