भगवान शिव (महामृत्युंजय) जप मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
अकाल मृत्यु से रक्षा, असाध्य रोगों से मुक्ति, दीर्घायु, अनिष्ट ग्रहों की शांति और जन्म-मरण के चक्र से मोक्ष। 2
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
अकाल मृत्यु से रक्षा, असाध्य रोगों से मुक्ति, दीर्घायु, अनिष्ट ग्रहों की शांति और जन्म-मरण के चक्र से मोक्ष। 2
इस मंत्र से क्या होगा?
अकाल मृत्यु से रक्षा, असाध्य रोगों से मुक्ति, दीर्घायु, अनिष्ट ग्रहों की शांति और जन्म-मरण के चक्र से मोक्ष
जाप विधि
सवा लाख जप का पुरश्चरण या नित्य १०८ बार। रुद्राक्ष माला अनिवार्य, कुशा आसन पर ब्रह्ममुहूर्त में। 2
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