भगवान शिव (महामृत्युंजय) जप मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
अकाल मृत्यु से रक्षा, असाध्य रोगों से मुक्ति, दीर्घायु, अनिष्ट ग्रहों की शांति और जन्म-मरण के चक्र से मोक्ष। 2
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
अकाल मृत्यु से रक्षा, असाध्य रोगों से मुक्ति, दीर्घायु, अनिष्ट ग्रहों की शांति और जन्म-मरण के चक्र से मोक्ष। 2
इस मंत्र से क्या होगा?
अकाल मृत्यु से रक्षा, असाध्य रोगों से मुक्ति, दीर्घायु, अनिष्ट ग्रहों की शांति और जन्म-मरण के चक्र से मोक्ष
जाप विधि
सवा लाख जप का पुरश्चरण या नित्य १०८ बार। रुद्राक्ष माला अनिवार्य, कुशा आसन पर ब्रह्ममुहूर्त में। 2
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श्रीम क्लीम सरस्वती बुद्ध जन्य स्वाहा सततम मंत्र राजोयम दक्षिणे मां सदावतु ऐम ह्रीम श्रीम क्लीम त्र्यक्षरो मंत्रो नैऋत्यम सर्वदावतु ओम ऐकवासिन्य स्वाहा मां वारुणेवतु ओम सर्वांबिकाय स्वाहा वायव्यमा सदावतु ओम ऐम श्रीम क्लीम गद्यवासिन्य स्वाहा माम उत्तरेवतु ऐम सर्वशास्त्र वासिन्ये स्वाहान्य सदा ओम ह्रीम सर्व पूजिता स्वाहा चोरध्वं सदावतु ओम ह्रीम पुस्तक वासिन्य स्वाहा धोमांम सदावतु ओम ग्रंथ बीज स्वरूपाय स्वाहा मां सर्वतो वतु इति कथित विप्र ब्राह्म मंत्र विग्रहम इदम विश्व जयं नाम कवचम ब्रह्म रूपकम पंचलक्ष जपे नैव सिद्धमु कवचम भवे यदि सिद्ध कवचो बृहस्पति समो भवे महा वाग्मी कविंद्र त्रैलोक्य विजयी भवेत 27
shanti mantraॐ वाङ् मे मनसि प्रतिष्ठिता । मनो मे वाचि प्रतिष्ठितम् । आविरावीर्म एधि । वेदस्य म आणीस्थः । श्रुतं मे मा प्रहासीः । अनेनाधीतेनाहोरात्रान्सन्दधामि । ऋतं वदिष्यामि । सत्यं वदिष्यामि । तन्मामवतु । तद्वक्तारमवतु । अवतु माम् । अवतु वक्तारम् । अवतु वक्तारम् ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
kaamya mantraश्रीं क्लीं श्रीं नमः॥
stotra mantraयस्मिन्निदं यतश्चेदं येनेदं य इदं स्वयं । योस्मात्परस्माच्च परस्तं प्रपद्ये स्वयम्भुवम ॥ 4
beej mantraदुं
dhyan mantraमनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥