चण्डी (उत्कीलन-१) जप मंत्र
ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं क्रां क्रीं चण्डिकादेव्यै शापनाशानुग्रहं कुरु कुरु स्वाहा
दुर्गा सप्तशती एवं नवार्ण मंत्र के शाप का शमन और अनुग्रह की प्राप्ति। 29
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
दुर्गा सप्तशती एवं नवार्ण मंत्र के शाप का शमन और अनुग्रह की प्राप्ति। 29
इस मंत्र से क्या होगा?
दुर्गा सप्तशती एवं नवार्ण मंत्र के शाप का शमन और अनुग्रह की प्राप्ति
जाप विधि
७ बार पाठ या जप। नवार्ण मंत्र जप के पूर्व। 29
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ॐ द्रां दत्तात्रेयाय नमः
kaamya mantraसर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
sabar mantraधन जैसे चुंबक खींचे लोह गोरख की आज्ञा टले नहीं मिटे साधक का मोह कीड़ा जागे पिंगला जागे सुष्मना का खुले द्वार जब तीनों नाड़ी जागे धन आवे बारंबार जैसे गंगा बहे अविरल जैसे सूरज देत उजास वैसे मेरे घर में लक्ष्मी करे सदा ही वास रुका धन चले बंद धन खुले आवे चहुं ओर से धन गोरख का शब्द सांचा रे सांचा रे गुरु का मन काल का भी काल है गोरख तीनों लोक बसेरा जो गोरख का नाम ले साधक उसका होए उजेरा उठ उठ लक्ष्मी आव बैठ मेरे द्वार गोरख की आज्ञा लेकर आव कर मेरा उद्धार शब्द सांचा पिंड कांचा सांची गुरु की बानी हुकुम गोरखनाथ का चले यही नाथ की निशानी 5
ugra mantraॐ खं खं खं सर्व शत्रु संहारणाय स्वाहा
naam mantraशशांक
shanti mantraॐ सह नाववतु । सह नौ भुनक्तु । सह वीर्यं करवावहै । तेजस्विनावधीतमस्तु मा विद्विषावहै ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥