मंगल नवग्रह मंत्र
ऐं ह्सौः श्रीं द्रां कं ग्रहाधिपतये भौमाय स्वाहा॥
घोर शत्रुओं का पूर्ण दमन, भयंकर युद्ध या उलझे हुए मुकदमों में एकतरफा विजय, और अचल संपत्ति के तांत्रिक अधिग्रहण हेतु इस आगम मंत्र की साधना की जाती है। 8
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
घोर शत्रुओं का पूर्ण दमन, भयंकर युद्ध या उलझे हुए मुकदमों में एकतरफा विजय, और अचल संपत्ति के तांत्रिक अधिग्रहण हेतु इस आगम मंत्र की साधना की जाती है। 8
इस मंत्र से क्या होगा?
घोर शत्रुओं का पूर्ण दमन, भयंकर युद्ध या उलझे हुए मुकदमों में एकतरफा विजय, और अचल संपत्ति के तांत्रिक अधिग्रहण हेतु इस आगम मंत्र की साधना की जाती है
जाप विधि
मंगलवार के दिन ताम्र या भोजपत्र पर निर्मित तिकोने मंगल यंत्र के समक्ष लाल चंदन की माला से नित्य एक माला जप। देवी भगवती या चामुंडा के पूजन के साथ यह अधिक फलदायी है। 8
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ॐ वराहाय नमः
dhyan mantraअतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्। सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥
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beej mantraक्लीं
stotra mantraबंधु समेत जबै अहिरावन, लै रघुनाथ पाताल सिधारो । देबिहिं पूजि भली बिधि सों बलि, देउ सबै मिति मंत्र बिचारो ॥ जाय सहाय भयो तब ही, अहिरावण सैन्य समेत सँहारो । को नहिं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो ॥ 40
kaamya mantraया श्रीः स्वयं सुकृतिनां भवनेष्वलक्ष्मीः पापात्मनां कृतधियां हृदयेषु बुद्धिः। श्रद्धा सतां कुलजनप्रभवस्य लज्जा तां त्वां नताः स्म परिपालय देवि विश्वम्॥