माँ सरस्वती (विद्यारम्भ मंत्र) ज्ञान मंत्र
सरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि । विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा ॥
स्मरण शक्ति, एकाग्रता और विद्याध्ययन में निर्विघ्न एवं स्थायी सफलता 4।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
स्मरण शक्ति, एकाग्रता और विद्याध्ययन में निर्विघ्न एवं स्थायी सफलता 4।
इस मंत्र से क्या होगा?
स्मरण शक्ति, एकाग्रता और विद्याध्ययन में निर्विघ्न एवं स्थायी सफलता
जाप विधि
किसी भी नवीन शिक्षा, पाठ्यक्रम या विद्या के आरम्भ से पूर्व जप 4।
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
ॐ ह्रीं क्लीं हूं मातंग्यै फट् स्वाहा
mool mantraॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः (सामान्य मूल: ॐ शुक्राय नमः)
jap mantraॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः
kaamya mantraॐ श्रीं महालक्ष्म्यै स्वाहा।
kavach mantraॐ भूर्भुव: स्व: प्रांचामा पातु भूतेशः अग्ने पातु शंकर दक्षिणे पातुमा रुद्रो नैऋत्य स्थानु रेवच पश्चिमे खंड परशु वायव्या चंद्रशेखर उत्तरे गिरीशः पातु चैशान्य ईश्वर स्वयं उर्ध्वे मुंड सदा पातु चाध्य मृत्युंजय स्वयं जले स्थले चांदरीक्षे स्वप्ने जागरने सदा पिना कितुमा प्रीत्या भक्तम वैभक्त वत्सल य: सदा धारयेन्मर्त्य: शैवं कवचमुत्तमम् । न तस्य जायते क्वापि भयं शंभोरनुग्रहात् ॥ 30॥ इति अमोघ शिव कवच सम्पूर्ण ॥ 4
dhyan mantraध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपद्मासनस्थं पीतं वासो वसानं नवकमलदलस्पर्धिनेत्रं प्रसन्नम्। वामाङ्कारूढ सीतामुखकमलमिलल्लोचनं नीरदाभं नानालङ्कारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डनं रामचन्द्रम्॥