सर्वदेव (ब्रह्म-तेज प्रदायिनी मेधा) ज्ञान मंत्र
इदं मे ब्रह्म च क्षत्रं चोभे श्रियमश्नुताम् । मयि देवा दधतु श्रियमुत्तमां तस्यै ते स्वाहा ॥
ब्रह्मज्ञान, श्रेष्ठ बौद्धिक ऐश्वर्य और शास्त्रों के गंभीर ज्ञान की प्राप्ति 2।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
ब्रह्मज्ञान, श्रेष्ठ बौद्धिक ऐश्वर्य और शास्त्रों के गंभीर ज्ञान की प्राप्ति 2।
इस मंत्र से क्या होगा?
ब्रह्मज्ञान, श्रेष्ठ बौद्धिक ऐश्वर्य और शास्त्रों के गंभीर ज्ञान की प्राप्ति
जाप विधि
विद्या, ज्ञान और तेज की प्राप्ति हेतु नित्य एकाग्र होकर पाठ 2।
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ॐ ये ते पाशा वरुण सप्तसप्त त्रेधा तिष्ठन्ति विषिता रुशन्तः । छिनन्तु सर्वे अनृतं वदन्तं यः सत्यवाद्यति तं सृजन्तु ॥
beej mantraह्रौं
dhyan mantraॐ असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्मा अमृतं गमय। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
sabar mantraराम कुण्डली, ब्रह्मचाक । तेतीस कोटि देवा देवा अमुक की बेड़ियां । अमुकेर अंकेर बाण काटम्। शर काटम् । संधान काटम् । कुज्ञान काटम् । कारवणे काटे । राजा रामचन्द्रेर आज्ञा । राजा रामचन्द्ररे ऐई झण्डी अमुकेर अंगे शीघ्र लागूगे 25
kavach mantraपातु श्रवणे वासरेश्वर घ्राणं धर्म पातु पदन वेदवाहन जीवा मानद पातु कंठ में सुरवंदित स्कंद प्रभाकर पातु वक्ष पातु जन प्रिय पातु पाद द्वादशात्मा सर्व सर्वांग सकलेश्वर यक्ष गन्धर्व राक्षसाः ब्रह्मराक्षस वेतालाः क्षमा दूरा देव पलायंते तस्य संकीर्तना अज्ञात कवच दिव्य यो जपे सूर्य मंत्रम् सिद्धि जायते तस्य कल्पकोटि शतैरपि। इति श्री ब्रह्मयामले त्रैलोक्य मंगलम नाम सूर्य कवचम संपूर्णम। 15
kaamya mantraॐ नमो भगवते वासुदेवाय धनं मे देहि दास्योः स्वाहा।