चंद्र नवग्रह मंत्र
ॐ शीतप्रभाय विद्महे षोडशकलाय धीमहि तन्नः सोमः प्रचोदयात्।
जीवन के सभी षोडश (सोलह) प्रकार के सुखों की प्राप्ति, उग्रता का शमन और दांपत्य जीवन में मधुरता लाने हेतु। 16
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
जीवन के सभी षोडश (सोलह) प्रकार के सुखों की प्राप्ति, उग्रता का शमन और दांपत्य जीवन में मधुरता लाने हेतु। 16
इस मंत्र से क्या होगा?
जीवन के सभी षोडश (सोलह) प्रकार के सुखों की प्राप्ति, उग्रता का शमन और दांपत्य जीवन में मधुरता लाने हेतु
जाप विधि
पूर्णिमा की रात्रि में चंद्रमा के समक्ष श्वेत वस्त्र धारण कर एक सौ आठ बार जप। 16
विशेष टिप्पणियाँ
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ॐ श्रीं ह्रीं सं सं ह्रीं श्रीं संकर्षणाय ॐ
ugra mantraओउम कालभैरवरूपाय त्रिनेत्राय महात्मने। प्रेतासनस्थितायैव खडगडमरूधारिणे।। जटाजूटधारी कराल वदनाय च। नमो नमः सदानंद भक्तवत्सल शम्भवे।। ओउम भं भैरवाय भीषणाय नखदंष्ट्राय विकर्तनाय। ताण्डवेशाय रक्तनेत्राय रक्षकाय शत्रुनाशकाय स्वाहा
sabar mantraओम नमो भूत प्रेत पिशाच दुष्ट दृष्टि विनाशाय ओम क्लीम स्वाहा 27
naam mantraरामचंद्र
dhyan mantraया कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना। या ब्रह्माच्युतशङ्करप्रभृतिभिर्देवैः सदा पूजिता सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥
shanti mantraॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षं शान्तिः पृथिवी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः । वनस्पतयः शान्तिर्विश्वेदेवाः शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः सर्वं शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥