गुरु नवग्रह मंत्र
देवानांच ऋषीनांच गुरुं कांचन सन्निभम्। बुद्धिभूतं त्रिलोकेशं तं नमामि बृहस्पतिम्॥
उच्च शिक्षा प्राप्ति, इष्ट देव व गुरुजनों की विशेष कृपा, सत्य और धर्म के मार्ग पर अडिग स्थिरता, और जीवन में नैतिकता व सद्गुणों के विकास हेतु महर्षि व्यास का यह मंत्र फलदायी है। 13
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यह मंत्र क्यों?
उच्च शिक्षा प्राप्ति, इष्ट देव व गुरुजनों की विशेष कृपा, सत्य और धर्म के मार्ग पर अडिग स्थिरता, और जीवन में नैतिकता व सद्गुणों के विकास हेतु महर्षि व्यास का यह मंत्र फलदायी है। 13
इस मंत्र से क्या होगा?
उच्च शिक्षा प्राप्ति, इष्ट देव व गुरुजनों की विशेष कृपा, सत्य और धर्म के मार्ग पर अडिग स्थिरता, और जीवन में नैतिकता व सद्गुणों के विकास हेतु महर्षि व्यास का यह मंत्र फलदायी है
जाप विधि
नित्य प्रातः विष्णु या शिव पूजा के समय पीले आसन पर बैठकर एक सौ आठ बार इस श्लोक का पाठ करें। 12
विशेष टिप्पणियाँ
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गदेऽशनिस्पर्शनविस्फुलिङ्गे निष्पिण्ढि निष्पिण्ढ्यजितप्रियासि। कूष्माण्डवैनायकयक्षरक्षोभूतग्रहांश्चूर्णय चूर्णयारीन्।। 7
sabar mantraॐ नमो आदेश गुरु का आदेश काली काली महाकाली इन्द्र की बेटी ब्रम्हा की साली चाम की गठरी हाड़ की माला भजो आनन्द सुंदरी बाला। भरपूर वसन करले उठाई काम क्रन्ति कलिका आई लुच्ची मोहन भोग भेट कड़ाही जहा भेजा वहा जाई कष्ट दुखो से लेव बचाई सभी देत्यन को मार भगाई आदि अंत तू रही सहाई में पूत तू मेरी माई सब दुखन से लेव बचाई गुरु की शक्ति हमारी भक्ति फुरे मंत्र दोहाई काली की ईश्वरो वाचा 12
vaidik mantraॐ परोऽपेहि मनस्पाप किमशस्तानि शंससि । परेहि न त्वा कामये वृक्षान् वनानि सं चर गृहेषु गोषु मे मनः ॥
naam mantraघुश्मेश्वर
shanti mantraॐ सह नाववतु । सह नौ भुनक्तु । सह वीर्यं करवावहै । तेजस्विनावधीतमस्तु मा विद्विषावहै ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
bhakti mantraजय श्री कृष्ण चैतन्य प्रभु नित्यानंद श्री अद्वैत गदाधर श्रीवासादि गौर भक्त वृन्द