गुरु नवग्रह मंत्र
देवानांच ऋषीनांच गुरुं कांचन सन्निभम्। बुद्धिभूतं त्रिलोकेशं तं नमामि बृहस्पतिम्॥
उच्च शिक्षा प्राप्ति, इष्ट देव व गुरुजनों की विशेष कृपा, सत्य और धर्म के मार्ग पर अडिग स्थिरता, और जीवन में नैतिकता व सद्गुणों के विकास हेतु महर्षि व्यास का यह मंत्र फलदायी है। 13
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
उच्च शिक्षा प्राप्ति, इष्ट देव व गुरुजनों की विशेष कृपा, सत्य और धर्म के मार्ग पर अडिग स्थिरता, और जीवन में नैतिकता व सद्गुणों के विकास हेतु महर्षि व्यास का यह मंत्र फलदायी है। 13
इस मंत्र से क्या होगा?
उच्च शिक्षा प्राप्ति, इष्ट देव व गुरुजनों की विशेष कृपा, सत्य और धर्म के मार्ग पर अडिग स्थिरता, और जीवन में नैतिकता व सद्गुणों के विकास हेतु महर्षि व्यास का यह मंत्र फलदायी है
जाप विधि
नित्य प्रातः विष्णु या शिव पूजा के समय पीले आसन पर बैठकर एक सौ आठ बार इस श्लोक का पाठ करें। 12
विशेष टिप्पणियाँ
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सिंहिकागर्भसंभूतं तं राहुं प्रणमाम्यहम् ॥ 35
ugra mantraॐ स्त्रीं आं अक्षोभ्य स्वाहा
sabar mantraॐ नमो काली कंकाली पीती भर भर रक्त प्याली चाम की गठड़ी हाड़ की माला भजो आनंद सुंदरी बाला भरपूर वसन कर ले उठाई काम क्रोध कलिका माई लेके अपनी भेंट कड़ाई अमुक की छाती घात चलाई घाट में मरघट कालिका आई कालिका ने अमुक की कच्ची कलेजी खाई न खाई तो कीनाराम औघड़ की दुहाई 12
naam mantraकूर्मदेव
jap mantraॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्राय नमः
shanti mantraॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पुर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥