शुक्र नवग्रह मंत्र
हिमकुंद मृणालाभं दैत्यानां परमं गुरुम्। सर्वशास्त्र प्रवक्तारं भार्गवं प्रणमाम्यहम्॥
प्रेम संबंधों में स्थिरता व सफलता, जीवन में सौम्यता, विवाह में आ रहे अकारण विलंब को नष्ट करने और शुक्र जनित चारित्रिक दोषों के परिमार्जन हेतु महर्षि व्यास का यह मंत्र उपयोगी है। 13
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
प्रेम संबंधों में स्थिरता व सफलता, जीवन में सौम्यता, विवाह में आ रहे अकारण विलंब को नष्ट करने और शुक्र जनित चारित्रिक दोषों के परिमार्जन हेतु महर्षि व्यास का यह मंत्र उपयोगी है। 13
इस मंत्र से क्या होगा?
प्रेम संबंधों में स्थिरता व सफलता, जीवन में सौम्यता, विवाह में आ रहे अकारण विलंब को नष्ट करने और शुक्र जनित चारित्रिक दोषों के परिमार्जन हेतु महर्षि व्यास का यह मंत्र उपयोगी है
जाप विधि
प्रतिदिन सायं काल एक सौ आठ बार इस श्लोक का पाठ करें। श्वेत चंदन का तिलक धारण करें। 12
विशेष टिप्पणियाँ
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ल्क्ष्मीः
kaamya mantraसर्वाबाधाविनिर्मुक्तो धनधान्यसुतान्वितः। मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः॥
mool mantraॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः (सामान्य मूल: ॐ शुक्राय नमः)
bhakti mantraॐ रामाय नमः
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siddh mantraकालीं कूर्चं परं नाम दक्षिणे दक्षिणे कालिके तता । वशिष्ठ मन्त्रं प्रोच्च्यार्थ मोचय दयमीश्वरि कालीं कूर्चं परे निरमेशास्याश्चापहारिणी ॥ कालीं भीमं ठटं भद्रकाली भीमं शिवस्यहि शापं मोचय युग्मापो विध्येयं चापहारिणी ॥