शनि नवग्रह मंत्र
ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः॥
शनि दोष के भयंकर कुप्रभावों से त्वरित मुक्ति, गंभीर मुकदमों में बचाव, राजदंड से मुक्ति और कर्म क्षेत्र या आजीविका में आ रही अज्ञात बाधाओं के शीघ्र शमन हेतु यह तांत्रिक बीज मंत्र अत्यंत शक्तिशाली है। 1
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
शनि दोष के भयंकर कुप्रभावों से त्वरित मुक्ति, गंभीर मुकदमों में बचाव, राजदंड से मुक्ति और कर्म क्षेत्र या आजीविका में आ रही अज्ञात बाधाओं के शीघ्र शमन हेतु यह तांत्रिक बीज मंत्र अत्यंत शक्तिशाली है। 11
इस मंत्र से क्या होगा?
शनि दोष के भयंकर कुप्रभावों से त्वरित मुक्ति, गंभीर मुकदमों में बचाव, राजदंड से मुक्ति और कर्म क्षेत्र या आजीविका में आ रही अज्ञात बाधाओं के शीघ्र शमन हेतु यह तांत्रिक बीज मंत्र अत्यंत शक्तिशाली है
जाप विधि
शनिवार सायं सूर्यास्त के पश्चात् नीले या काले वस्त्र धारण कर तेईस हजार बार चालीस दिनों की अवधि में जप पूर्ण करें। जप के समय सरसों के तेल का दीपक पश्चिम मुखी होना चाहिए। 9
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सदसस्पतिमद्भुतं प्रियमिन्द्रस्य काम्यम् । सनिं मेधामयासिषं स्वाहा ॥
siddh mantraॐ गरुडाय हुं
ugra mantraॐ नमो विपरीत-प्रत्यंगिरायै सहस्त्रानेक-कार्य-लोचनायै कोटि-विद्युज्जिह्वायै महा-व्याव्यापिन्यै संहार-रुपायै जन्म-शान्ति-कारिण्यै। मम स-परिवारकस्य भावि-भूत-भवच्छत्रून् स-दाराऽपत्यान् संहारय संहारय, महा-प्रभावं दर्शय दर्शय, हिलि हिलि, किलि किलि, मिलि मिलि, चिलि चिलि, भूरि भूरि, विद्युज्जिह्वे, ज्वल ज्वल, प्रज्वल प्रज्वल, ध्वंसय ध्वंसय, प्रध्वंसय प्रध्वंसय, ग्रासय ग्रासय, पिब पिब, नाशय नाशय, त्रासय त्रासय, वित्रासय वित्रासय, मारय मारय, विमारय विमारय, भ्रामय भ्रामय, विभ्रामय विभ्रामय, द्रावय द्रावय, विद्रावय विद्रावय हूं हूं फट् स्वाहा।।
shanti mantraॐ भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवाः । भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः । स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवागँसस्तनूभिः । व्यशेम देवहितं यदायूः । स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः । स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः । स्वस्ति नस्ताक्षर्यो अरिष्टनेमिः । स्वस्ति नो वृहस्पतिर्दधातु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
naam mantraमल्लिकार्जुन
tantrik mantraऐं क्लीं सौः