गुरु नवग्रह मंत्र
ॐ बृं बृहस्पतये नमः (अथवा ॐ ह्रीं क्लीं हूं बृहस्पतये नमः)
गुरु के मारक प्रभाव का दैनिक शमन, पाचन तंत्र के रोगों से बचाव और सामान्य गुरु दोष की त्वरित शांति हेतु। 7
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
गुरु के मारक प्रभाव का दैनिक शमन, पाचन तंत्र के रोगों से बचाव और सामान्य गुरु दोष की त्वरित शांति हेतु। 7
इस मंत्र से क्या होगा?
गुरु के मारक प्रभाव का दैनिक शमन, पाचन तंत्र के रोगों से बचाव और सामान्य गुरु दोष की त्वरित शांति हेतु
जाप विधि
नित्य संध्या या प्रातः काल एक सौ आठ बार हल्दी माला से। 7
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भानु
shanti mantraॐ सर्वेषां स्वस्तिर्भवतु । सर्वेषां शान्तिर्भवतु । सर्वेषां पूर्णं भवतु । सर्वेषां मङ्गलं भवतु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
kavach mantraपातु श्रवणे वासरेश्वर घ्राणं धर्म पातु पदन वेदवाहन जीवा मानद पातु कंठ में सुरवंदित स्कंद प्रभाकर पातु वक्ष पातु जन प्रिय पातु पाद द्वादशात्मा सर्व सर्वांग सकलेश्वर यक्ष गन्धर्व राक्षसाः ब्रह्मराक्षस वेतालाः क्षमा दूरा देव पलायंते तस्य संकीर्तना अज्ञात कवच दिव्य यो जपे सूर्य मंत्रम् सिद्धि जायते तस्य कल्पकोटि शतैरपि। इति श्री ब्रह्मयामले त्रैलोक्य मंगलम नाम सूर्य कवचम संपूर्णम। 15
sabar mantraओम नमो भूत प्रेत पिशाच दुष्ट दृष्टि विनाशाय ओम क्लीम स्वाहा 27
beej mantraभ्रीं
dhyan mantraकस्तूरीतिलकं ललाटपटले वक्षःस्थले कौस्तुभं नासाग्रे नवमौक्तिकं करतले वेणुं करे कङ्कणम्। सर्वाङ्गे हरिचन्दनं सुललितं कण्ठे च मुक्तावलिं गोपस्त्रीपरिवेष्टितो विजयते गोपालचूडामणिः॥