बुध नवग्रह मंत्र
ॐ गजध्वजाय विद्महे शुकहस्ताय धीमहि तन्नो बुधः प्रचोदयात्।
व्यापारिक वृद्धि, वाक् चातुर्य से विरोधियों को शांत करने और हास्य-विनोद व कलात्मक अभिव्यक्ति में निपुणता हेतु। 16
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
व्यापारिक वृद्धि, वाक् चातुर्य से विरोधियों को शांत करने और हास्य-विनोद व कलात्मक अभिव्यक्ति में निपुणता हेतु। 16
इस मंत्र से क्या होगा?
व्यापारिक वृद्धि, वाक् चातुर्य से विरोधियों को शांत करने और हास्य-विनोद व कलात्मक अभिव्यक्ति में निपुणता हेतु
जाप विधि
नित्य स्फटिक या रुद्राक्ष माला से एक सौ आठ बार जप। 16
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
ॐ अग्निः पूर्वेभिर्ऋषिभिरीड्यो नूतनैरुत । स देवाँ एह वक्षति ॥
shanti mantraॐ सर्वेषां स्वस्तिर्भवतु । सर्वेषां शान्तिर्भवतु । सर्वेषां पूर्णं भवतु । सर्वेषां मङ्गलं भवतु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
beej mantraदं
kavach mantraसकलायुध सम्पूर्ण निखिलाङ्ग सुदर्शन यदम कवच दिव्यम परमानंद दायिनं सौदर्शन यो सदा शुद्ध पठे नरह तस्या सिद्धि विपुला करस्था भवति ध्रुवं कोष्माण्ड चण्ड भूता ये दुष्टा ग्रहा स्मृता पलायन्ते निशंभीता वर्मनोस्य प्रभावतः कुष्ठा पस्मा गुलमा व्याध कर्म हेतुका नश्य तन मंत्रिता भूपाना सप्त दिनावधी अनेन मन्त्रिता मृतानां तुलसी मूल संस्थितां ललाटे तिलकं कृत्वा मोहये त्रिजगन्नरः। 17
ugra mantraॐ ह्रीं क्लीं हूँ मातंग्यै फट् स्वाहा
dhyan mantraमनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥