शुक्र नवग्रह मंत्र
ॐ अश्वध्वजाय विद्महे धनुर्हस्ताय धीमहि तन्नः शुक्रः प्रचोदयात्।
वीर्य संबंधी विकारों का नाश, गुप्त रोगों से मुक्ति और विपरीत लिंगी आकर्षण में वृद्धि हेतु। 16
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
वीर्य संबंधी विकारों का नाश, गुप्त रोगों से मुक्ति और विपरीत लिंगी आकर्षण में वृद्धि हेतु। 16
इस मंत्र से क्या होगा?
वीर्य संबंधी विकारों का नाश, गुप्त रोगों से मुक्ति और विपरीत लिंगी आकर्षण में वृद्धि हेतु
जाप विधि
शुक्रवार को सायं काल स्फटिक माला से एक सौ आठ बार जप। 16
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नमः कमलवासिन्यै स्वाहा॥
shanti mantraॐ वाङ् मे मनसि प्रतिष्ठिता । मनो मे वाचि प्रतिष्ठितम् । आविरावीर्म एधि । वेदस्य म आणीस्थः । श्रुतं मे मा प्रहासीः । अनेनाधीतेनाहोरात्रान्सन्दधामि । ऋतं वदिष्यामि । सत्यं वदिष्यामि । तन्मामवतु । तद्वक्तारमवतु । अवतु माम् । अवतु वक्तारम् । अवतु वक्तारम् ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
dhyan mantraॐ असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्मा अमृतं गमय। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
mool mantraॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः
vaidik mantraॐ यत्प्रज्ञानमुत चेतो धृतिश्च यज्ज्योतिरन्तरमृतं प्रजासु । यस्मान्न ऋते किंचन कर्म क्रियते तन्मे मनः शिवसंकल्पमस्तु ।।
stotra mantraकालेन पंचत्वमितेषु कृत्स्नशो लोकेषु पालेषु च सर्व हेतुषु । तमस्तदाsssसीद गहनं गभीरं यस्तस्य पारेsभिविराजते विभुः ॥ 4