शुक्र नवग्रह मंत्र
ॐ अश्वध्वजाय विद्महे धनुर्हस्ताय धीमहि तन्नः शुक्रः प्रचोदयात्।
वीर्य संबंधी विकारों का नाश, गुप्त रोगों से मुक्ति और विपरीत लिंगी आकर्षण में वृद्धि हेतु। 16
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
वीर्य संबंधी विकारों का नाश, गुप्त रोगों से मुक्ति और विपरीत लिंगी आकर्षण में वृद्धि हेतु। 16
इस मंत्र से क्या होगा?
वीर्य संबंधी विकारों का नाश, गुप्त रोगों से मुक्ति और विपरीत लिंगी आकर्षण में वृद्धि हेतु
जाप विधि
शुक्रवार को सायं काल स्फटिक माला से एक सौ आठ बार जप। 16
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ॐ ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुर सुंदरीयै नमः ॥
sabar mantraॐ नमो काली कंकाली पीती भर भर रक्त प्याली चाम की गठड़ी हाड़ की माला भजो आनंद सुंदरी बाला भरपूर वसन कर ले उठाई काम क्रोध कलिका माई लेके अपनी भेंट कड़ाई अमुक की छाती घात चलाई घाट में मरघट कालिका आई कालिका ने अमुक की कच्ची कलेजी खाई न खाई तो कीनाराम औघड़ की दुहाई 12
kaamya mantraॐ ऐं महासरस्वत्यै नमः।
naam mantraषण्मुख
bhakti mantraराम राम
dhyan mantraॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥