केतु नवग्रह मंत्र
ॐ चित्रवर्णाय विद्महे सर्परूपाय धीमहि तन्नः केतुः प्रचोदयात्।
अंतर्ज्ञान (Intuition) का प्रचंड जागरण, वैराग्य की सार्थकता, और सर्प दोष या स्वप्न दोष के निवारण हेतु। 16
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
अंतर्ज्ञान (Intuition) का प्रचंड जागरण, वैराग्य की सार्थकता, और सर्प दोष या स्वप्न दोष के निवारण हेतु। 16
इस मंत्र से क्या होगा?
अंतर्ज्ञान (Intuition) का प्रचंड जागरण, वैराग्य की सार्थकता, और सर्प दोष या स्वप्न दोष के निवारण हेतु
जाप विधि
नित्य इक्कीस या एक सौ आठ बार रात्रि काल में पाठ। 16
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
अहं ब्रह्मास्मि
mool mantraॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः
vaidik mantraॐ मेधां म इन्द्रो दधातु मेधां देवी सरस्वती । मेधां मे अश्विनावुभावाधत्तां पुष्करस्रजौ ॥
stotra mantraयः स्वात्मनीदं निजमाययार्पितं क्वचिद्विभातं क्व च तत्तिरोहितम । अविद्धदृक साक्ष्युभयं तदीक्षते स आत्म मूलोsवत् मां परात्परः ॥ 4
beej mantraप्रीं
kaamya mantraसर्वाबाधाविनिर्मुक्तो धनधान्यसुतान्वितः। मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः॥