शनि नवग्रह मंत्र
ॐ ह्रीं श्रीं ग्रहचक्रवर्तिने शनैश्चराय क्लीं ऐंसः स्वाहा॥
शनि की ग्रहीय चक्रवर्तित्व की ऊर्जा से घोर शत्रुओं, अभिचार कर्मों (काले जादू) और अदृश्य तांत्रिक बाधाओं को समूल नष्ट करने तथा गूढ़ सिद्धियों की प्राप्ति हेतु। 8
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यह मंत्र क्यों?
शनि की ग्रहीय चक्रवर्तित्व की ऊर्जा से घोर शत्रुओं, अभिचार कर्मों (काले जादू) और अदृश्य तांत्रिक बाधाओं को समूल नष्ट करने तथा गूढ़ सिद्धियों की प्राप्ति हेतु। 8
इस मंत्र से क्या होगा?
शनि की ग्रहीय चक्रवर्तित्व की ऊर्जा से घोर शत्रुओं, अभिचार कर्मों (काले जादू) और अदृश्य तांत्रिक बाधाओं को समूल नष्ट करने तथा गूढ़ सिद्धियों की प्राप्ति हेतु
जाप विधि
शनिवार रात्रि काल में लोहे या सीसे के शनि यंत्र के समक्ष सरसों के तेल का दीपक जलाकर रुद्राक्ष या काले हकीक की माला से जप। 8
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ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महासरस्वती देव्यै नमः ॥
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vaidik mantraॐ सत्यं बृहदृतमुग्रं दीक्षा तपो ब्रह्म यज्ञः पृथिवीं धारयन्ति । सा नो भूतस्य भव्यस्य पत्न्युरुं लोकं पृथिवी नः कृणोतु ॥
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kaamya mantraॐ ऐं श्रीं महालक्ष्म्यै कमल-वारिण्यै गरुड़ वाहिन्यै श्रीं ह्रीं ऐं स्वाहा।