शनि नवग्रह मंत्र
ॐ ह्रीं श्रीं ग्रहचक्रवर्तिने शनैश्चराय क्लीं ऐंसः स्वाहा॥
शनि की ग्रहीय चक्रवर्तित्व की ऊर्जा से घोर शत्रुओं, अभिचार कर्मों (काले जादू) और अदृश्य तांत्रिक बाधाओं को समूल नष्ट करने तथा गूढ़ सिद्धियों की प्राप्ति हेतु। 8
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
शनि की ग्रहीय चक्रवर्तित्व की ऊर्जा से घोर शत्रुओं, अभिचार कर्मों (काले जादू) और अदृश्य तांत्रिक बाधाओं को समूल नष्ट करने तथा गूढ़ सिद्धियों की प्राप्ति हेतु। 8
इस मंत्र से क्या होगा?
शनि की ग्रहीय चक्रवर्तित्व की ऊर्जा से घोर शत्रुओं, अभिचार कर्मों (काले जादू) और अदृश्य तांत्रिक बाधाओं को समूल नष्ट करने तथा गूढ़ सिद्धियों की प्राप्ति हेतु
जाप विधि
शनिवार रात्रि काल में लोहे या सीसे के शनि यंत्र के समक्ष सरसों के तेल का दीपक जलाकर रुद्राक्ष या काले हकीक की माला से जप। 8
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
नासां वैवस्वत: पातु मुखं मे भास्कर: सदा । नाभिं गृहपति: पातु मन्द: पातु कटिं तथा । पदौ मन्दगति: पातु सर्वांग पातु पिप्पल: । आंगो पांगानी सर्वानी रक्षे में सूर्य नंदन इत्तेत कवच देव पठे सूर्य सुतस्य यह नतस्य जायते पीडा प्रीतो भवति सूर्य जह व्यय जन्म द्वितीय मृत्यु स्थान गतो पिवा कलस्थो गतो वापी सुप्रीतु सदाशनी अष्टमस्थे सूर्यसुते व्यये जन्म द्वितीयगे। कवचं पठते नित्यं न पीडा जायते क्वचित्। इत्य तत कवचम दिव्यम सौरे निर्मित पुरा जन्म लग्न स्थिता दोषा सर्वान नाश्यते प्रभु इति शनि कवच संपूर्णं ॥ 20
stotra mantraयक्षस्वरूपाय जटाधराय पिनाकहस्ताय सनातनाय। दिव्याय देवाय दिगम्बराय तस्मै य काराय नमः शिवाय॥ 19
mool mantraॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्यधिपतये धनधान्यसमृद्धिम मे देहि दापय स्वाहा
beej mantraरां
tantrik mantraॐ ऐं ऐं महाभैरवि एहि एहि ईशानदिशायां बन्धय बन्धय ईशानमुखं स्तम्भय स्तम्भय ईशानशस्त्रं निवारय निवारय सर्वसैन्यं कीलय कीलय पच पच मथ मथ मर्दय मर्दय ॐ ह्लीं वश्यं कुरु करु ॐ ह्लां बगलामुखि हुं फट् स्वाहा
jap mantraॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ स्वाहा