कुबेर (यक्ष धन-धान्य मूल मंत्र) मूल मंत्र
ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्यधिपतये धनधान्यसमृद्धिम मे देहि दापय स्वाहा
रुके हुए या खोए हुए धन की पुनः प्राप्ति, अष्ट-लक्ष्मी का वास, विपुल संपत्ति और कभी न समाप्त होने वाले ऐश्वर्य की सिद्धि 1।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
रुके हुए या खोए हुए धन की पुनः प्राप्ति, अष्ट-लक्ष्मी का वास, विपुल संपत्ति और कभी न समाप्त होने वाले ऐश्वर्य की सिद्धि 1।
इस मंत्र से क्या होगा?
रुके हुए या खोए हुए धन की पुनः प्राप्ति, अष्ट-लक्ष्मी का वास, विपुल संपत्ति और कभी न समाप्त होने वाले ऐश्वर्य की सिद्धि
जाप विधि
धनतेरस, दीपावली या नित्य प्रातः कुबेर यंत्र के समक्ष कमलगट्टे की माला से जप करें। कुबेर सिद्धि हेतु १०८ दिनों तक प्रतिदिन ७२० बार (कुल ७२,००० बार) जप करने का विशेष तांत्रिक विधान है 1।
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स्कन्धौ पातु गजस्कन्धः स्तनौ विघ्नविनाशनः । हृदयं गणनाथस्तु हेरम्बो जठरं महान् ॥ धराधरः पातु पार्श्वौ पृष्ठं विघ्नहरः शुभः । लिङ्गं गुह्यं सदा पातु वक्रतुण्डो महाबलः ॥ गणक्रीडो जानुजङ्घे ऊरू मङ्गलमूर्तिमान् । एकदन्तो महाबुद्धिः पादौ गुल्फौ सदाऽवतु ॥ क्षिप्रप्रसादनो बाहू पाणी आशाप्रपूरकः । अङ्गुलीश्च नखान्पातु पद्महस्तोऽरिनाशनः ॥ सर्वाङ्गानि मयूरेशो विश्वव्यापी सदाऽवतु । अनुक्तमपि यत्स्थानं धूम्रकेतुः सदाऽवतु ॥ आमोदस्त्वग्रतः पातु प्रमोदः पृष्ठतोऽवतु । प्राच्यां रक्षतु बुद्धीश आग्नेय्यां सिद्धिदायकः ॥ दक्षिणस्यामुमापुत्रो नैऋत्यां तु गणेश्वरः । प्रतीच्यां विघ्नहर्ताऽव्याद्वायव्यां गजकर्णकः ॥ कौबेर्यां निधिपः पायादीशान्यामीशनन्दनः । दिवाऽव्यादेकदन्तस्तु रात्रौ सन्ध्यासु विघ्नहृत् ॥ 14
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jap mantraॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः
tantrik mantraॐ क्रीं क्रीं क्रीं ॐ ह्रीं ह्रीं हूं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा
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