कुबेर (यक्ष धन-धान्य मूल मंत्र) मूल मंत्र
ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्यधिपतये धनधान्यसमृद्धिम मे देहि दापय स्वाहा
रुके हुए या खोए हुए धन की पुनः प्राप्ति, अष्ट-लक्ष्मी का वास, विपुल संपत्ति और कभी न समाप्त होने वाले ऐश्वर्य की सिद्धि 1।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
रुके हुए या खोए हुए धन की पुनः प्राप्ति, अष्ट-लक्ष्मी का वास, विपुल संपत्ति और कभी न समाप्त होने वाले ऐश्वर्य की सिद्धि 1।
इस मंत्र से क्या होगा?
रुके हुए या खोए हुए धन की पुनः प्राप्ति, अष्ट-लक्ष्मी का वास, विपुल संपत्ति और कभी न समाप्त होने वाले ऐश्वर्य की सिद्धि
जाप विधि
धनतेरस, दीपावली या नित्य प्रातः कुबेर यंत्र के समक्ष कमलगट्टे की माला से जप करें। कुबेर सिद्धि हेतु १०८ दिनों तक प्रतिदिन ७२० बार (कुल ७२,००० बार) जप करने का विशेष तांत्रिक विधान है 1।
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