सोम / पवमान सूक्त (सामवेद परम्परा) वैदिक मंत्र
ॐ पुनन्तु मा देवजनाः पुनन्तु मनसा धियः । पुनन्तु विश्वा भूतानि जातवेदः पुनीहि मा ॥
शरीर, मन, बुद्धि, दिशाओं और अंतरिक्ष सहित सम्पूर्ण पर्यावरण का आत्यन्तिक शुद्धिकरण एवं पाप-मुक्ति।
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यह मंत्र क्यों?
शरीर, मन, बुद्धि, दिशाओं और अंतरिक्ष सहित सम्पूर्ण पर्यावरण का आत्यन्तिक शुद्धिकरण एवं पाप-मुक्ति।
इस मंत्र से क्या होगा?
शरीर, मन, बुद्धि, दिशाओं और अंतरिक्ष सहित सम्पूर्ण पर्यावरण का आत्यन्तिक शुद्धिकरण एवं पाप-मुक्ति
जाप विधि
होम-अनुष्ठान, पवित्रीकरण संस्कार अथवा तीर्थ-स्नान और जल-मार्जन करते समय उद्गाता द्वारा उच्च स्वर में गान।
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ॐ कं कामवशितायै नमः स्वाहा ।
stotra mantraसिद्धिबुद्धिप्रदे देवि भुक्तिमुक्तिप्रदायिनि । मन्त्रमूर्ते सदा देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥ 29
sabar mantraराम कुण्डली, ब्रह्मचाक । तेतीस कोटि देवा देवा अमुक की बेड़ियां । अमुकेर अंकेर बाण काटम्। शर काटम् । संधान काटम् । कुज्ञान काटम् । कारवणे काटे । राजा रामचन्द्रेर आज्ञा । राजा रामचन्द्ररे ऐई झण्डी अमुकेर अंगे शीघ्र लागूगे 25
bhakti mantraॐ नमो भगवते वासुदेवाय
mool mantraदिगंबरा दिगंबरा श्रीपाद वल्लभ दिगंबरा
kaamya mantraॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम्॥