परमात्मा / ईशावास्य (४०.१) वैदिक मंत्र
ॐ ईशावास्यमिदं सर्वं यत्किञ्च जगत्यां जगत् । तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा मा गृधः कस्यस्विद्धनम् ॥
सांसारिक पदार्थों से वैराग्य, ईश्वर की सर्वव्यापकता का बोध, लोभ का नाश एवं त्याग-पूर्वक भोग की वृत्ति।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
सांसारिक पदार्थों से वैराग्य, ईश्वर की सर्वव्यापकता का बोध, लोभ का नाश एवं त्याग-पूर्वक भोग की वृत्ति।
इस मंत्र से क्या होगा?
सांसारिक पदार्थों से वैराग्य, ईश्वर की सर्वव्यापकता का बोध, लोभ का नाश एवं त्याग-पूर्वक भोग की वृत्ति
जाप विधि
आत्म-चिंतन, संन्यास दीक्षा अथवा ब्रह्म-यज्ञ के समय पद्मासन में बैठकर शान्त भाव से मनन एवं उपांशु जप।
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प्रां
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siddh mantraॐ ऐं वाग्देव्यै विद्महे कामराजाय धीमहि । तन्नो देवी प्रचोदयात्॥
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