परमात्मा / ईशावास्य (४०.१) वैदिक मंत्र
ॐ ईशावास्यमिदं सर्वं यत्किञ्च जगत्यां जगत् । तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा मा गृधः कस्यस्विद्धनम् ॥
सांसारिक पदार्थों से वैराग्य, ईश्वर की सर्वव्यापकता का बोध, लोभ का नाश एवं त्याग-पूर्वक भोग की वृत्ति।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
सांसारिक पदार्थों से वैराग्य, ईश्वर की सर्वव्यापकता का बोध, लोभ का नाश एवं त्याग-पूर्वक भोग की वृत्ति।
इस मंत्र से क्या होगा?
सांसारिक पदार्थों से वैराग्य, ईश्वर की सर्वव्यापकता का बोध, लोभ का नाश एवं त्याग-पूर्वक भोग की वृत्ति
जाप विधि
आत्म-चिंतन, संन्यास दीक्षा अथवा ब्रह्म-यज्ञ के समय पद्मासन में बैठकर शान्त भाव से मनन एवं उपांशु जप।
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भद्रकाली
siddh mantraॐ इं इशितायै नमः स्वाहा ।
sabar mantraकाल भैरव का जो नाम ले नर नारी उसके लिए मूठ कभी ना पड़े भारी जय जय काल भैरव देव मूठ चली हवा बनकर काल भैरव चले ढाल बनकर अष्ट हाथ भैरव जी के फैले काट दी जड़ मूठ की चढ़ा दी आकाश नीचे काटी ऊपर काटी काट दी पाताल में 11
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bhakti mantraॐ श्री कालिकायै नमः