मन / शिवसंकल्प सूक्त (३४.३) वैदिक मंत्र
ॐ यत्प्रज्ञानमुत चेतो धृतिश्च यज्ज्योतिरन्तरमृतं प्रजासु । यस्मान्न ऋते किंचन कर्म क्रियते तन्मे मनः शिवसंकल्पमस्तु ।।
प्रखर ज्ञान की जागृति, धैर्य (धृति) की स्थापना, आंतरिक चेतना का विकास एवं अमर ज्योति का प्रत्यक्षीकरण।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
प्रखर ज्ञान की जागृति, धैर्य (धृति) की स्थापना, आंतरिक चेतना का विकास एवं अमर ज्योति का प्रत्यक्षीकरण।
इस मंत्र से क्या होगा?
प्रखर ज्ञान की जागृति, धैर्य (धृति) की स्थापना, आंतरिक चेतना का विकास एवं अमर ज्योति का प्रत्यक्षीकरण
जाप विधि
मानसिक अवसाद या अस्थिरता के समय शांत स्थान पर बैठकर प्राण वायु पर ध्यान केन्द्रित करते हुए जप।
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