मन / शिवसंकल्प सूक्त (३४.३) वैदिक मंत्र
ॐ यत्प्रज्ञानमुत चेतो धृतिश्च यज्ज्योतिरन्तरमृतं प्रजासु । यस्मान्न ऋते किंचन कर्म क्रियते तन्मे मनः शिवसंकल्पमस्तु ।।
प्रखर ज्ञान की जागृति, धैर्य (धृति) की स्थापना, आंतरिक चेतना का विकास एवं अमर ज्योति का प्रत्यक्षीकरण।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
प्रखर ज्ञान की जागृति, धैर्य (धृति) की स्थापना, आंतरिक चेतना का विकास एवं अमर ज्योति का प्रत्यक्षीकरण।
इस मंत्र से क्या होगा?
प्रखर ज्ञान की जागृति, धैर्य (धृति) की स्थापना, आंतरिक चेतना का विकास एवं अमर ज्योति का प्रत्यक्षीकरण
जाप विधि
मानसिक अवसाद या अस्थिरता के समय शांत स्थान पर बैठकर प्राण वायु पर ध्यान केन्द्रित करते हुए जप।
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
भर्जनं भवबीजानामर्जनं सुखसंपदाम् । तर्जनं यमदूतानां रामरामेति गर्जनम् ॥ 16
gyan mantraसदसस्पतिमद्भुतं प्रियमिन्द्रस्य काम्यम् । सनिं मेधामयासिषं स्वाहा ॥
sabar mantraगुरु गोरखनाथ की दुहाई। भूत-प्रेत भागे, मारो घुड़ाई। शब्द सांचा, पीर मेरा पावना। गुरु गोरखनाथ की आग्या 13
mool mantraॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः (सामान्य मूल: ॐ केतवे नमः)
kaamya mantraॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्रीं नमो भगवति मम समृद्धौ ज्वल ज्वल मां सर्व सम्पदं देहि देहि मम अलक्ष्मीं नाशय नाशय फट् स्वाहा।
bhakti mantraराधे कृष्ण राधे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण राधे राधे