ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
मन / शिवसंकल्प सूक्त (३४.४)

मन / शिवसंकल्प सूक्त (३४.४) वैदिक मंत्र

ॐ येनेदं भूतं भुवनं भविष्यत् परिगृहीतममृतेन सर्वम् । येन यज्ञस्तायते सप्तहोता तन्मे मनः शिवसंकल्पमस्तु ।।

त्रिकाल-ज्ञान की क्षमता का विकास, अहंकार का शमन, यज्ञीय जीवन-पद्धति का अनुसरण एवं पारलौकिक ज्ञान।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारवैदिक मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

त्रिकाल-ज्ञान की क्षमता का विकास, अहंकार का शमन, यज्ञीय जीवन-पद्धति का अनुसरण एवं पारलौकिक ज्ञान।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

त्रिकाल-ज्ञान की क्षमता का विकास, अहंकार का शमन, यज्ञीय जीवन-पद्धति का अनुसरण एवं पारलौकिक ज्ञान

जाप विधि

यज्ञीय कर्मकाण्ड या दैनिक उपासना की पूर्णाहुति के समय अग्नि के समक्ष बैठकर सस्वर पाठ।

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