माता भगवती बालपरमेश्वरी भक्ति मंत्र
ॐ श्री बालपरमेश्वर्यै नमः
हृदय में मासूमियत, शुद्धता और निश्छल प्रेम का विकास करना, तथा देवी की मातृवत कृपा और सुरक्षा प्राप्त करना 45।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
हृदय में मासूमियत, शुद्धता और निश्छल प्रेम का विकास करना, तथा देवी की मातृवत कृपा और सुरक्षा प्राप्त करना 45।
इस मंत्र से क्या होगा?
हृदय में मासूमियत, शुद्धता और निश्छल प्रेम का विकास करना, तथा देवी की मातृवत कृपा और सुरक्षा प्राप्त करना
जाप विधि
इस मंत्र का जप देवी के बाल स्वरूप (कन्या रूप) का ध्यान करते हुए पूर्ण पवित्रता और वात्सल्य भाव से किया जाता है 45।
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ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
kavach mantraशम्भुर्मे मस्तकं पातु मुखं पातु महेश्वरः। दन्तपङ्क्तिं च नीलकण्ठोऽप्यधरोष्ठं हरः स्वयम्। कण्ठं पातु चन्द्रचूडः स्कन्धौ वृषवाहनः। वक्षःस्थलं नीलकण्ठः पातु पृष्ठं दिगम्बरः। स्वप्ने जागरणे चैव स्थाणुर्मे पातु सन्ततम्। 8
siddh mantraॐ नमो भगवती वद वद वाग्देवी स्वाहा
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beej mantraहुं
sabar mantraओम नमो आदेश गुरु जी को आदेश पहला गण गणपति 14 विद्या सारथी जति सती कैलाशपति बल भीम मारुती आले विघ्न निवारी साईं गोरखनाथ की दुआही गुरु की शक्ति मेरी भक्ति चले मंत्र ईश्वरी वाचा पिंड कच्चा गुरु गोरखनाथ का शब्द सच्चा 24