ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
भगवान शिव

भगवान शिव भक्ति मंत्र

ॐ नमः शिवाय

यह मंत्र मन की चंचलता को स्थिर कर अज्ञान और सांसारिक मोह से पूर्ण वैराग्य दिलाता है 22। इसके निरंतर जप से भगवान शिव के प्रति अटूट भक्ति उत्पन्न होती है, और यह आत्मा को परब्रह्म के साथ एकाकार कर मोक्ष

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

जप काउंटर लोड हो रहा है...

प्रकारभक्ति मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

यह मंत्र मन की चंचलता को स्थिर कर अज्ञान और सांसारिक मोह से पूर्ण वैराग्य दिलाता है 22। इसके निरंतर जप से भगवान शिव के प्रति अटूट भक्ति उत्पन्न होती है, और यह आत्मा को परब्रह्म के साथ एकाकार कर मोक्ष का सीधा मार्ग प्रशस्त करता है 49।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

यह मंत्र मन की चंचलता को स्थिर कर अज्ञान और सांसारिक मोह से पूर्ण वैराग्य दिलाता है 22

02

इसके निरंतर जप से भगवान शिव के प्रति अटूट भक्ति उत्पन्न होती है, और यह आत्मा को परब्रह्म के साथ एकाकार कर मोक्ष का सीधा मार्ग प्रशस्त करता है

जाप विधि

इस पंचाक्षर महामंत्र का जप रुद्राक्ष की १०८ मनकों वाली माला पर करना सर्वथा प्रामाणिक है 1। जप आरंभ करने से पूर्व शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित कर, धूप-दीप प्रज्वलित करना अत्यंत शुभ माना गया है 47। साधक को एकांत व शांत वातावरण में, मेरुदंड सीधा रखकर, पूर्ण पवित्रता और गुरु के निर्देशानुसार मानसिक (बिना होंठ हिलाए) या उपांशु (फुसफुसाते हुए) रूप में इसका जप करना चाहिए 1।

विशेष टिप्पणियाँ

इसे भी पढ़ें

अलग-अलग श्रेणियों से

हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें

jap mantra

अंजनीगर्भित संभूत कपूर रामप्रिय नमस्तुभ्यं हनुमं रक्ष सर्वदा

vaidik mantra

ॐ समानी व आकूतिः समाना हृदयानि वः । समानमस्तु वो मनो यथा वः सुसहासति ॥

gyan mantra

ॐ नमो भगवति सरस्वती परमेश्वरी वाग्वादिनी मं विद्यां देहि भगवति हंसवाहिनी हंससमारूढा बुद्धिं देहि देहि प्रज्ञां देहि देहि विद्या परमेश्वरी सरस्वती स्वाहा ॥

mool mantra

ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः

stotra mantra

विद्युदुद्योतवत्प्रस्फुरद्वाससं प्रावृडम्भोदवत्प्रोल्लसद्विग्रहम्। वन्यया मालया शोभितोर:स्थलं लोहितांघ्रिद्वयं वारिजाक्षं भजे।। 9

tantrik mantra

ॐ क्रीं क्रीं क्रीं ॐ ह्रीं ह्रीं हूं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा