भगवान शिव भक्ति मंत्र
ॐ नमः शिवाय
यह मंत्र मन की चंचलता को स्थिर कर अज्ञान और सांसारिक मोह से पूर्ण वैराग्य दिलाता है 22। इसके निरंतर जप से भगवान शिव के प्रति अटूट भक्ति उत्पन्न होती है, और यह आत्मा को परब्रह्म के साथ एकाकार कर मोक्ष
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
यह मंत्र मन की चंचलता को स्थिर कर अज्ञान और सांसारिक मोह से पूर्ण वैराग्य दिलाता है 22। इसके निरंतर जप से भगवान शिव के प्रति अटूट भक्ति उत्पन्न होती है, और यह आत्मा को परब्रह्म के साथ एकाकार कर मोक्ष का सीधा मार्ग प्रशस्त करता है 49।
इस मंत्र से क्या होगा?
यह मंत्र मन की चंचलता को स्थिर कर अज्ञान और सांसारिक मोह से पूर्ण वैराग्य दिलाता है 22
इसके निरंतर जप से भगवान शिव के प्रति अटूट भक्ति उत्पन्न होती है, और यह आत्मा को परब्रह्म के साथ एकाकार कर मोक्ष का सीधा मार्ग प्रशस्त करता है
जाप विधि
इस पंचाक्षर महामंत्र का जप रुद्राक्ष की १०८ मनकों वाली माला पर करना सर्वथा प्रामाणिक है 1। जप आरंभ करने से पूर्व शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित कर, धूप-दीप प्रज्वलित करना अत्यंत शुभ माना गया है 47। साधक को एकांत व शांत वातावरण में, मेरुदंड सीधा रखकर, पूर्ण पवित्रता और गुरु के निर्देशानुसार मानसिक (बिना होंठ हिलाए) या उपांशु (फुसफुसाते हुए) रूप में इसका जप करना चाहिए 1।
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