भगवान श्री विष्णु (वासुदेव) भक्ति मंत्र
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
यह मंत्र जीवन के सभी भौतिक कष्टों, दुखों और ग्रहों के अशुभ प्रभावों (नवग्रह दोष) से मुक्ति दिलाता है 7। भगवान वासुदेव के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण समर्पण का भाव उत्पन्न कर, यह साधक को जीवन में सफलता,
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
यह मंत्र जीवन के सभी भौतिक कष्टों, दुखों और ग्रहों के अशुभ प्रभावों (नवग्रह दोष) से मुक्ति दिलाता है 7। भगवान वासुदेव के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण समर्पण का भाव उत्पन्न कर, यह साधक को जीवन में सफलता, वैराग्य और अंततः आध्यात्मिक मोक्ष की ओर ले जाता है 8।
इस मंत्र से क्या होगा?
यह मंत्र जीवन के सभी भौतिक कष्टों, दुखों और ग्रहों के अशुभ प्रभावों (नवग्रह दोष) से मुक्ति दिलाता है 7
भगवान वासुदेव के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण समर्पण का भाव उत्पन्न कर, यह साधक को जीवन में सफलता, वैराग्य और अंततः आध्यात्मिक मोक्ष की ओर ले जाता है
जाप विधि
इस प्रसिद्ध द्वादशाक्षर महामंत्र का जप पूर्ण पवित्रता के साथ मेरुदंड को सीधा रखकर सुखासन में किया जाना चाहिए 1। जप के लिए तुलसी की १०८ मनकों वाली माला का प्रयोग आवश्यक है, जो २७ नक्षत्रों के चार चरणों का प्रतिनिधित्व करती है 7। जिस माला को गले या कलाई में धारण किया जाता है, उससे जप नहीं करना चाहिए और जप की माला को धारण नहीं करना चाहिए; खंडित माला का उपयोग पूर्णतः निषिद्ध है 7। जप करते समय भगवान वासुदेव के चतुर्भुज स्वरूप, उनके श्वेत वस्त्रों और शांत मुखमंडल का मानसिक ध्यान करना चाहिए 8। कम से कम १०८ बार (एक माला) का नित्य जप अनिवार्य माना गया है 8।
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