तारा महाविद्या (उग्र तारा / नील सरस्वती) सिद्ध मंत्र
ॐ ह्रीं स्त्रीं हुं फट् ॥
यह मंत्र ज्ञान और बुद्धि (नील सरस्वती रूप) का बीजारोपण करता है 16। जीवन के सबसे कठिन और विकट संकटों से उबारना, भयंकर विष के प्रभाव को नष्ट करना, वाक् सिद्धि (Nithya Vak) प्रदान करना, आकस्मिक धन और परम
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
यह मंत्र ज्ञान और बुद्धि (नील सरस्वती रूप) का बीजारोपण करता है 16। जीवन के सबसे कठिन और विकट संकटों से उबारना, भयंकर विष के प्रभाव को नष्ट करना, वाक् सिद्धि (Nithya Vak) प्रदान करना, आकस्मिक धन और परम मोक्ष की प्राप्ति इस विद्या का मुख्य उद्देश्य है 1।
इस मंत्र से क्या होगा?
यह मंत्र ज्ञान और बुद्धि (नील सरस्वती रूप) का बीजारोपण करता है 16
जीवन के सबसे कठिन और विकट संकटों से उबारना, भयंकर विष के प्रभाव को नष्ट करना, वाक् सिद्धि (Nithya Vak) प्रदान करना, आकस्मिक धन और परम मोक्ष की प्राप्ति इस विद्या का मुख्य उद्देश्य है
जाप विधि
इस मंत्र की दीक्षा एक आत्म-साक्षात्कारी सिद्ध गुरु से प्राप्त करना अनिवार्य है 19। पूजा स्थल पर तीन अगरबत्ती जलाकर देवी के नीलवर्णा स्वरूप का ध्यान किया जाता है 19। यदि साधक ने किसी की मृत्यु के संस्कार किए हैं, तो तीन महीने तक, और उसके परिवार को ११ दिनों तक इस मंत्र का जप वर्जित है 19।
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
ॐ क्रीं हूं क्रीं सर्व शत्रु स्तंभिनी घोर कालिकायै फट्
sabar mantraॐ नमो काली कंकाली पीती भर भर रक्त प्याली चाम की गठड़ी हाड़ की माला भजो आनंद सुंदरी बाला भरपूर वसन कर ले उठाई काम क्रोध कलिका माई लेके अपनी भेंट कड़ाई अमुक की छाती घात चलाई घाट में मरघट कालिका आई कालिका ने अमुक की कच्ची कलेजी खाई न खाई तो कीनाराम औघड़ की दुहाई 12
naam mantraसुब्रह्मण्य
navgrah mantraॐ ह्रां क्रीं टं ग्रहनाथाय बुधाय स्वाहा॥
jap mantraअंजनीगर्भित संभूत कपूर रामप्रिय नमस्तुभ्यं हनुमं रक्ष सर्वदा
vaidik mantraॐ सुषारथिरश्वानिव यन्मनुष्यान्नेनीयतेऽभीशुभिर्वाजिन इव । हृत्प्रतिष्ठं यदजिरं जविष्ठं तन्मे मनः शिवसंकल्पमस्तु ।।