ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
कमला महाविद्या (पूर्ण सिद्धि विधान)

कमला महाविद्या (पूर्ण सिद्धि विधान) सिद्ध मंत्र

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः

मानव शरीर के सात प्रमुख चक्रों (Chakras) का उद्घाटन 49। यह कमला महाविद्या की पूर्ण सिद्धि प्रदान करता है, जिससे साधक के भीतर और बाहर अपार ऐश्वर्य, परम सौंदर्य और समस्त लौकिक एवं अलौकिक इच्छाओं की तत्क

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

जप काउंटर लोड हो रहा है...

प्रकारसिद्ध मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

मानव शरीर के सात प्रमुख चक्रों (Chakras) का उद्घाटन 49। यह कमला महाविद्या की पूर्ण सिद्धि प्रदान करता है, जिससे साधक के भीतर और बाहर अपार ऐश्वर्य, परम सौंदर्य और समस्त लौकिक एवं अलौकिक इच्छाओं की तत्काल पूर्ति होती है 49।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

मानव शरीर के सात प्रमुख चक्रों (Chakras) का उद्घाटन 49

02

यह कमला महाविद्या की पूर्ण सिद्धि प्रदान करता है, जिससे साधक के भीतर और बाहर अपार ऐश्वर्य, परम सौंदर्य और समस्त लौकिक एवं अलौकिक इच्छाओं की तत्काल पूर्ति होती है

जाप विधि

इस मंत्र की पूर्ण तांत्रिक सिद्धि हेतु सवा लाख (१,२५,०००) जप और विशिष्ट हवन सामग्री से १२,५०० आहुतियां दी जाती हैं 49। जप के लिए छह या सात मुखी रुद्राक्ष अथवा तुलसी की माला का उपयोग अनिवार्य है 49।

विशेष टिप्पणियाँ

इसे भी पढ़ें

अलग-अलग श्रेणियों से

हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें

kaamya mantra

देव्या यया ततमिदं जगदात्मशक्त्या निश्शेषदेवगणशक्तिसमूहमूत्र्या। तामम्बिकामखिलदेवमहर्षिपूज्यां भक्त्या नताः स्म विदधातु शुभानि सा नः॥

mool mantra

ॐ ऐं ऐं मनो वाञ्छित सिद्धये ऐं ऐं ॐ

ugra mantra

ॐ भम भैरवाय नमस्तुभ्यम कपाले कृपणाय चंड मुंड विनाशाय वीरभद्र स्वरूपण सर्वत्र प्रभ देव रक्षक सुरा त्रोक्य विजय संभो नमस्ते काल रूपण ओम छम काल भैरवाय क्रूर रूपाय विकिरण मूर्धने श्री नेत्राय खग धणे दुर्जया भय हराय सर्व शत्रु संारकाय स्वाहा

sabar mantra

भैरव शिव का चेला जहां जहां-जहां जाऊं नगर डगर लगे वहां फिर मेला शिव का धुना गोरख तापे काल कंटक थर थर कांपे मेरी रक्षा करें नवनाथ रामदूत हनुमंत रिद्धि सिद्धि आंगन विराजे माई अन्नपूर्णा सुखवंत शब्द सांचा पिंड काचा चलो मंत्र ईश्वर वाचा ओम गुरु जी गोरख जति मच्छिंद्र का चेला शिव के रूप में दिखे अलबेला कानों कुंडल गले में नादी हाथ त्रिशूल नाथ है आदि अलख पुरुष को करूं आदेश जन्म जन्म के काटो कलेश भगवा वेश हाथ में खप्पर भैरव शिव का चेला जहां जहां जाऊं नगर डगर लगे वहां फिर मेला शिव का धुना गोरख तापे काल कंटक थर थर कांपे मेरी रक्षा करें नवनाथ रामदूत हनुमंत रिद्धि सिद्धि आंगन विराजे माई अन्नपूर्णा सुखवंत शब्द सांचा पिंड कांचा चलो मंत्र ईश्वर वाचा 2

naam mantra

शिव शिव

shanti mantra

ॐ सह नाववतु । सह नौ भुनक्तु । सह वीर्यं करवावहै । तेजस्विनावधीतमस्तु मा विद्विषावहै ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥