ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
नृसिंह गायत्री (वज्रनख)

नृसिंह गायत्री (वज्रनख) सिद्ध मंत्र

ॐ वज्रनखाय विद्महे तीक्ष्णदंष्ट्राय धीमहि तन्नो नृसिंहः प्रचोदयात् ॥

आसुरी शक्तियों और नकारात्मकता से दैवीय सुरक्षा 66। यह आंतरिक दुर्बलता को समाप्त कर बौद्धिक तीक्ष्णता (Sharp intellect), भावनात्मक संतुलन और आध्यात्मिक प्रगति को तीव्र करता है 66।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारसिद्ध मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

आसुरी शक्तियों और नकारात्मकता से दैवीय सुरक्षा 66। यह आंतरिक दुर्बलता को समाप्त कर बौद्धिक तीक्ष्णता (Sharp intellect), भावनात्मक संतुलन और आध्यात्मिक प्रगति को तीव्र करता है 66।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

आसुरी शक्तियों और नकारात्मकता से दैवीय सुरक्षा 66

02

यह आंतरिक दुर्बलता को समाप्त कर बौद्धिक तीक्ष्णता (Sharp intellect), भावनात्मक संतुलन और आध्यात्मिक प्रगति को तीव्र करता है

जाप विधि

बिना तांत्रिक बीज अक्षरों के होने के कारण इसे सामान्य पूजा, जप और ध्यान में सरलता से प्रयोग किया जा सकता है 66।

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