नृसिंह गायत्री (वज्रनख) सिद्ध मंत्र
ॐ वज्रनखाय विद्महे तीक्ष्णदंष्ट्राय धीमहि तन्नो नृसिंहः प्रचोदयात् ॥
आसुरी शक्तियों और नकारात्मकता से दैवीय सुरक्षा 66। यह आंतरिक दुर्बलता को समाप्त कर बौद्धिक तीक्ष्णता (Sharp intellect), भावनात्मक संतुलन और आध्यात्मिक प्रगति को तीव्र करता है 66।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
आसुरी शक्तियों और नकारात्मकता से दैवीय सुरक्षा 66। यह आंतरिक दुर्बलता को समाप्त कर बौद्धिक तीक्ष्णता (Sharp intellect), भावनात्मक संतुलन और आध्यात्मिक प्रगति को तीव्र करता है 66।
इस मंत्र से क्या होगा?
आसुरी शक्तियों और नकारात्मकता से दैवीय सुरक्षा 66
यह आंतरिक दुर्बलता को समाप्त कर बौद्धिक तीक्ष्णता (Sharp intellect), भावनात्मक संतुलन और आध्यात्मिक प्रगति को तीव्र करता है
जाप विधि
बिना तांत्रिक बीज अक्षरों के होने के कारण इसे सामान्य पूजा, जप और ध्यान में सरलता से प्रयोग किया जा सकता है 66।
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
वं
mool mantraॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय
kaamya mantraदुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि। दारिद्र्यदुःखभयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदाऽऽर्द्रचित्ता॥
bhakti mantraजय जगन्नाथ
stotra mantraस्तुवन्ति ये स्तुतिभिरमीभिरन्वहं त्रयीमयीं त्रिभुवनमातरं रमाम् । गुणाधिका गुरुतरभाग्यभागिनो भवन्ति ते भुवि बुधभाविताशयाः ॥ 31
jap mantraॐ ह्रं ह्रीं ह्रूं कालभैरवाय फट्