सिद्धि प्रदायक मंत्र
54 मंत्रॐ नमः वज्र का कोठा । जिसमे पिण्ड हमारो पेठा । ईश्वर कुंजी । ब्रह्मा का ताला । मेरे आठो धाम का यति हनुमंत रखवाला ॥
अचूक आत्म-सुरक्षा 78। यह मंत्र साधक के चारों ओर वज्र का अभेद्य कवच बना देता है जो शत्रुओं, दुष्ट आत्माओं, और काले जादू से पूर्णतः सुरक्षित रखता है 78।
ॐ अघोरेभ्यः अथ घोरेभ्यो घोरघोरतरेभ्यश्च । सर्वतः शर्व सर्वेभ्यो नमस्ते रुद्ररूपेभ्यः ॥
मूलाधार में बैठे भय को जलाकर नाभि चक्र की अग्नि में भस्म कर देना 57। यह उच्च-आवृत्ति (High-frequency) वाला आभामंडल (Aura) बनाता है जो बुरी नज़र, ईर्ष्या, और तां…
ॐ उग्र नरसिंहाय विद्महे वज्रनखाय धीमहि तन्नो नृसिंहः प्रचोदयात् ॥
असीम शौर्य, साहस और निर्भयता की प्राप्ति 66। यह मारक ग्रह दशाओं (Planetary afflictions) को शांत करता है और भयंकर तंत्र प्रयोगों से साधक की रक्षा करता है 66।
उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम् । नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम् ॥
महासिद्धि की प्राप्ति 64। इस मंत्र के सिद्ध होने पर साधक में सृष्टि, स्थिति, संहार, अनुग्रह और तिरोभाव—ईश्वर के इन पांचों कृत्यों को करने की क्षमता आ जाती है 64…
ॐ वज्रनखाय विद्महे तीक्ष्णदंष्ट्राय धीमहि तन्नो नृसिंहः प्रचोदयात् ॥
आसुरी शक्तियों और नकारात्मकता से दैवीय सुरक्षा 66। यह आंतरिक दुर्बलता को समाप्त कर बौद्धिक तीक्ष्णता (Sharp intellect), भावनात्मक संतुलन और आध्यात्मिक प्रगति को…
ॐ सहस्रार हुं फट्
अत्यंत उग्र सुरक्षा और शत्रुओं का पूर्ण रूप से सिर काटना (आध्यात्मिक व ऊर्जा स्तर पर) 68। यह अस्त्र साधक के मार्ग में आने वाली किसी भी बाधा को प्रलयंकारी अग्नि…
ॐ श्रीं महादेव्यै सरस्वत्यै स्वाहा
प्रचुर भौतिक समृद्धि (Abundance) और सर्वोच्च ज्ञान दोनों की एक साथ प्राप्ति 70। यह साधक को ऐश्वर्य के साथ-साथ मेधावी बनाता है 70।
ॐ नमो भगवती वद वद वाग्देवी स्वाहा
वाक् सिद्धि की प्राप्ति 70। मस्तिष्क के शिक्षण केंद्रों (Learning centers) का पूर्ण सक्रियकरण 71। इससे साधक की वाणी में अचूक प्रभाव आता है और जो कहा जाता है, वह…
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुर सुंदरीयै नमः ॥
सांसारिक आनंद (Pleasure) और आध्यात्मिक मुक्ति (Liberation) दोनों की एक साथ प्राप्ति 22। यह शरीर, मन और भावनाओं को पूर्ण रूप से नियंत्रित करने की शक्ति देता है 2…
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं वाग्देव्यै सरस्वत्यै नमः
स्मृति (Memory), एकाग्रता (Focus) और बुद्धिमत्ता में असाधारण वृद्धि 72। यह कलात्मक क्षमताओं को जन्म देता है और उच्च आध्यात्मिक ज्ञान के मार्ग को प्रशस्त करता है…
ॐ वद वद वाग्वादिनि स्वाहा
अभिव्यक्ति (Expression) और भाषण कला में अलौकिक निपुणता 70। यह बुद्धि के अवरोधों को खोलकर साधक को महान विद्वान और वाग्मी बना देता है 70।
ॐ वाग्देव्यैच विद्महे ब्रह्म-पत्न्यैच धीमहि। तन्नो वाणी प्रचोदयात्॥
अंतर्ज्ञान (Intuition) का जागरण 74। मन के गहरे अंधकार का नाश कर वाणी को पवित्र और उन्नत करना 74।
ॐ ऐं वाग्देव्यै विद्महे कामराजाय धीमहि । तन्नो देवी प्रचोदयात्॥
कला, शिक्षा और ज्ञान के क्षेत्र में असीमित सफलता 74। यह मंत्र मन को शांत कर बौद्धिक स्पष्टता और तीव्र एकाग्रता प्रदान करता है 74।
त्वमस्मिन् कार्य निर्योगे प्रमाणं हरि सत्तम । हनुमान यत्नमास्थाय दुःख क्षय करो भव ॥
असाध्य और फंसे हुए कार्यों (जैसे गंभीर कोर्ट केस) में निश्चित विजय 77। यह दुर्भाग्य, देरी और जीवन के अवरोधों को नष्ट कर दैवीय समर्थन (Daiva Bal) प्रदान करता है…
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं कृष्णाय गोविन्दाय गोपीजन वल्लभाय पराय परमपुरुषाय परात्मने परकर्म मन्त्र यन्त्र तन्त्र औषध विष आभिचार अस्त्र शस्त्र संहर संहर मृत्युर् मोचय मोचय । ॐ नमो भगवते महा सुदर्शनाय । ॐ प्रीं रीं रुँ दीप्त्रेय ज्वलापरीताय सर्वदिग्क्षोभनकाराय कारय हुं फट् परब्रह्मणे परमज्योतिषे स्वाहा ।
सभी प्रकार के रोग, विष, अस्त्र-शस्त्र, और अभिचार (Black Magic) कर्मों का समूल नाश 67। यह साधक को कर्म-बंधनों से मुक्त करता है और अकाल मृत्यु को टालकर सभी शारीरि…
ॐ गरुडाय हुं
नकारात्मक ऊर्जा और भय से पूर्ण रक्षा 79। शारीरिक और सूक्ष्म स्तर के विष (Physical and karmic poison) का समूल नाश और अपार साहस की प्राप्ति 79।
ॐ ह्रीं द्रां दत्तात्रेय हरेकृष्ण उन्मत्तानन्द दायक दिगम्बर । मुने बाल पिशाच ज्ञान सागर द्रां ह्रीं ॐ ॥
कर्म बंधनों की निवृत्ति, अवचेतन की रुकावटों का निवारण, और ज्ञान के महासागर (Gnana Sagara) तक पहुँच 84। यह साधक को आत्म-साक्षात्कार (Self-realization) और परम वैर…
क ए ई ल ह्रीं । ह स क ह ल ह्रीं । स क ल ह्रीं ॥
यह त्रिपुर सुंदरी का सबसे गूढ़ मंत्र है जो साधक की कुण्डलिनी ऊर्जा को सीधे जाग्रत करता है 24। इसका उद्देश्य ज्ञान शक्ति का प्रकटीकरण, शिव और शक्ति का पूर्ण तादा…
ॐ ऐं क्लीं शीघ्र कार्य सिद्धय फट्
किसी भी अटके हुए या लक्षित कार्य की तत्काल एवं त्वरित सिद्धि 87। यह सीधा और शीघ्र प्रभाव उत्पन्न करने वाला अत्यंत शक्तिशाली तांत्रिक प्रयोग है 87।
ॐ द्रां दत्तात्रेयाय नमः
राहु और केतु जैसे क्रूर ग्रहों की नकारात्मक और अस्थिर ऊर्जा का शमन 76। भगवान दत्तात्रेय के माध्यम से ब्रह्मा, विष्णु और महेश (त्रिमूर्ति) की एकीकृत कृपा और आध्य…
ॐ पक्षि स्वाहा
भयंकर रोगों और महामारियों से रक्षा 81। सिद्ध धर्म के अनुसार यह नाड़ी बंध (Energy blockages) को खोलकर कुण्डलिनी ग्रंथि का भेदन करता है 80।
ॐ बन्धय बन्धय मारय मारय नाशय नाशय हुं फट् स्वाहा
भूत-प्रेत, वेताल, और ब्रह्मराक्षस जैसी नकारात्मक शक्तियों का पूर्ण शमन 86। यह उग्र तांत्रिक कर्मों (स्तम्भन, विद्वेषण, उच्चाटन) में प्रयुक्त होता है और गहरे मनो…
श्मशान भैरवि नररुधिरास्थि - वसाभक्षिणि सिद्धिं मे देहि मम मनोरथान् पूरय हुं फट् स्वाहा ॥
किसी भी असंभव मनोकामना की तत्काल पूर्ति, अत्यंत उग्र और गुप्त तांत्रिक सिद्धियों की प्राप्ति, और मारण/उच्चाटन जैसी शक्तियों का जागरण 35। यह साधक को तंत्र के सर्…
इदमिन्द्र प्रति हव्यं गृभाय सत्याः सन्तु यजमानस्य कामाः
महान उपलब्धियों और सफलता की प्राप्ति 88। यह मंत्र मानसिक स्पष्टता (Mental clarity) लाता है, सकारात्मक सोच को मजबूत करता है, और साधक की सभी महान इच्छाओं को सत्य…
ॐ ऐं क्लीं सौः। क ए ल ह ह्रीं। सौः क्लीं ऐं। ॐ ऐं क्लीं सौः। क स क ह ल ह्रीं। सौः क्लीं ऐं। ॐ ऐं क्लीं सौः। स क ल ह्रीं । सौः क्लीं ऐं ॐ॥
अहंकार और सीमित चेतना (Egocentrism) का पूर्ण विनाश 28। यह ब्रह्मांडीय करुणा (Universal Compassion) को जाग्रत करता है 28। धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—इन चारों पुरुष…
ॐ ह्रीं भैरवी कलौं ह्रीं स्वाहा ॥
अज्ञानता के अंधकार और भय का संपूर्ण विनाश 34। यह मंत्र साधक के भीतर योद्धा के समान ऊर्जा (Warrior energy) भरता है 33। कुण्डलिनी शक्ति का जागरण, नकारात्मक ऊर्जा…
ॐ ह्रीं भुवनेश्वर्यै नमः
ब्रह्मांड की रानी (Queen of the Universe) की शक्तियों का आह्वान 11। यह मंत्र गंभीर आर्थिक संकटों, दरिद्रता, मानसिक तनाव और वैवाहिक जीवन की बाधाओं को नष्ट करता ह…
ॐ मं मूषिकायै गणाधिपवाहनाय धर्मराजाय स्वाहा ।
यह साधना मुख्य रूप से यम (धर्मराज) और पूर्व जन्मों के घोर कर्म फलों को शांत करने के लिए है 53। यह पापों का शमन कर साधक के जीवन के भारी बोझ और दुखों को दूर करती…
कालीं कूर्चं परं नाम दक्षिणे दक्षिणे कालिके तता । वशिष्ठ मन्त्रं प्रोच्च्यार्थ मोचय दयमीश्वरि कालीं कूर्चं परे निरमेशास्याश्चापहारिणी ॥ कालीं भीमं ठटं भद्रकाली भीमं शिवस्यहि शापं मोचय युग्मापो विध्येयं चापहारिणी ॥
महाविद्या के मंत्र को वशिष्ठ मुनि के शाप से मुक्त करना 12। इसके प्रयोग से मुख्य साधना के दौरान आने वाली बाधाएं समाप्त होती हैं, साधक को गुरु-सुरक्षा प्राप्त होत…
ॐ त्रिपुरायै विद्महे महाभैरव्यै धीमहि तन्नो देवी प्रचोदयात् ॥
शारीरिक और मानसिक स्तर पर जमी हुई गहरी नकारात्मकता की सफाई 34। यह चेतना को निर्मल करता है, अवांछित बाधाओं को स्वतः हटा देता है, और साधक को सर्वोच्च आध्यात्मिक क…
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं वज्र वैरोचनीये हूं हूं फट् स्वाहा ॥
ईडा, पिंगला और सुषुम्ना नाड़ियों का प्रत्यक्ष जागरण 8। यह काम और रति (भौतिक वासना) पर पूर्ण विजय, देह-अहंकार का विनाश, और शत्रुओं का निर्मूलन करता है 8। यह मंत्…
ॐ धूं धूं धूमावती स्वाहा
अष्टसिद्धियों की प्राप्ति और कुण्डलिनी चक्र का तीव्र जागरण 9। यह केतु ग्रह के महादोष, असाध्य दरिद्रता, और गंभीर संकटों का नाश करता है 9। जीवन की नश्वरता का बोध…
ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिव्हां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा ॥
वाक् सिद्धि और सर्वोच्च स्तम्भन (Paralyzing force) 2। यह विरोधियों की वाणी, बुद्धि और गति को जड़ कर देता है 3। गंभीर मुकदमों में विजय, राजनीतिक या व्यावसायिक प्…
ॐ ह्रीं क्लीं हूं मातंग्यै फट् स्वाहा
वाक् सिद्धि, कला, संगीत और संचार कौशल (Communication) में अद्वितीय निपुणता 43। यह मंत्र मानसिक कोलाहल (Mental noise) को शांत कर वातावरण को सकारात्मक बनाता है 44…
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं ह्सौः जगत्प्रसूत्यै नमः ॥
तंत्र में इसे 'साम्राज्यदायिनी विद्या' कहा जाता है 47। यह दरिद्रता का समूल नाश कर साधक को अखंड धन, संपत्ति, वैभव, भाग्य और पूर्ण सफलता प्रदान करती है 47। भौतिक…
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः
मानव शरीर के सात प्रमुख चक्रों (Chakras) का उद्घाटन 49। यह कमला महाविद्या की पूर्ण सिद्धि प्रदान करता है, जिससे साधक के भीतर और बाहर अपार ऐश्वर्य, परम सौंदर्य औ…
हस्ति-पिशाचि-लिखे स्वाहा ।
संचित कर्मों (Sanchita Karmas) का पूर्ण विनाश 51। यह 'क्षिप्र सिद्धि दायक' (Quick bestower of accomplishments) है 51। साधक का अहंकार शून्य हो जाता है और उसे अपा…
ॐ ह्रीं गं हस्ति-पिशाचि-लिखे स्वाहा ।
गंभीर आर्थिक संकटों, पुराने कर्जों और वित्तीय अस्थिरता का शमन। यह मंत्र कुण्डलिनी शक्ति को सक्रिय कर साधक के जीवन में भारी भौतिक संपन्नता और आध्यात्मिक पूर्णता…
ॐ हस्ति पिशाचि लिखे स्वाहा ।
यह शिव और शक्ति (Brahman) के परम मिलन का प्रतीक है 52। इसके प्रभाव से बौद्धिक क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि होती है, सभी प्रकार की प्रतिस्पर्धाओं में अजेय विजय मि…
ॐ महा काल्यै छ विद्महे स्मसन वासिन्यै छ धीमहि तन्नो काली प्रचोदयात
साधक के स्थूल और सांसारिक विचारों का दिव्य चेतना में रूपांतरण 17। यह अज्ञानता और मृत्यु के भय को नष्ट कर, साधक के मन को भौतिकता से निकालकर काली की शुद्ध और सूक्…
ॐ नमः उच्छिष्ट-गणेशाय हस्ति-पिशाचि-लिखे स्वाहा ।
पूर्व जन्मों के जटिल पापों और शापों का निवारण। यह जीवन की दुर्गम बाधाओं को नष्ट कर सर्वोच्च तांत्रिक सिद्धि और निर्बाध सफलता सुनिश्चित करता है 53।
ॐ क्रीं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं हूं हूं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं हूं हूं स्वाहा ॥
इस महारानी (Queen of Mantras) सिद्धि मंत्र का मुख्य प्रयोजन धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति है 15। यह साधक के अहंकार (Ahamkara) का पूर्ण…
ॐ मं महिमायै नमः स्वाहा ।
भौतिक शरीर को असीमित, विशाल और ब्रह्मांडीय स्तर (Gigantic/Celestial scale) तक विस्तारित करने की शक्ति 54। यह चेतना की संकीर्णता को तोड़कर साधक को 'विराट' सोचने…
ॐ अं अणिमायै नमः स्वाहा ।
अपने भौतिक शरीर को अणु (Atom) के समान अत्यंत सूक्ष्म कर लेने की अलौकिक शक्ति 50। आध्यात्मिक और मनोवैज्ञानिक रूप से यह अहंकार के पूर्ण समर्पण और परम विनम्रता (Hu…
ॐ प्रं प्राप्त्यै नमः स्वाहा ।
ब्रह्मांड में किसी भी वस्तु को प्राप्त करने या कहीं भी बिना रोक-टोक के पहुँचने की क्षमता (Teleportation / Unhindered access) 50। यह साधक के मानसिक फोकस को इतना…
ॐ इं इशितायै नमः स्वाहा ।
प्रकृति और उसके पांचों तत्वों (Earth, Water, Fire, Air, Space) पर पूर्ण तांत्रिक नियंत्रण (Lordship) 50। यह साधक को ईश्वर के समान सृजन और संचालन की दृष्टि तथा अ…
ॐ वं वशितायै नमः स्वाहा ।
सभी प्राणियों के मन, विचारों और व्यवहार पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित करने की शक्ति 50। आधुनिक संदर्भ में यह प्रेम, करुणा और ऊर्जा के माध्यम से दूसरों को असीमित रूप…
ॐ कं कामवशितायै नमः स्वाहा ।
किसी भी अवस्था या परिस्थिति में असीमित रूप से जीवित रहने की क्षमता और मन की हर इच्छा को तत्काल पूर्ण करने की शक्ति 50। यह साधक को अपनी सच्चाई और संकल्प को साहसप…
ॐ गं गरिमायै नमः स्वाहा ।
स्वयं को अनंत रूप से भारी बना लेने की क्षमता, जिसे कोई हिला न सके 50। आध्यात्मिक रूप से यह साधक को उसके सिद्धांतों और मूल्यों में 'अचल' और दृढ़ बना देता है 50।
ॐ सिं सिद्ध्यै नमः स्वाहा ।
समस्त प्रकार की अलौकिक शक्तियों और सिद्धियों का पूर्ण प्रकटीकरण 53। यह साधक को सांसारिक बंधनों से पूर्णतः मुक्त कर ब्रह्मांडीय प्रवाह में स्थापित करता है।
ॐ ह्रीं स्त्रीं हुं फट् ॥
यह मंत्र ज्ञान और बुद्धि (नील सरस्वती रूप) का बीजारोपण करता है 16। जीवन के सबसे कठिन और विकट संकटों से उबारना, भयंकर विष के प्रभाव को नष्ट करना, वाक् सिद्धि (Ni…
ॐ ह्रौं जूं सः भूर्भुवः स्वः त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् । उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् भूर्भुवः स्वरौ जूं सः ह्रौं ॐ ॥
अकाल मृत्यु पर विजय, असाध्य रोगों का शमन, और लंबी आयु की प्राप्ति 59। यह मंत्र शरीर के अवरुद्ध ऊर्जा केंद्रों (Energy points) को खोलता है, नकारात्मकता के विरुद्…
ॐ श्लीं पशु हुं फट्
यह ब्रह्मांड का सबसे प्रलयंकारी और अनियंत्रित अस्त्र मंत्र है 62। इसका उपयोग केवल चरम परिस्थितियों में होता है। यह मारण, उच्चाटन, और महाशत्रुओं के पूर्ण विनाश क…
ॐ हर महेश्वरः शूल पाणी पिनक द्रिक पशुपती शिव महादेव नमः शिवाय ॥
अजेय शत्रुओं और विरोधी शक्तियों का तत्काल दमन 62। यह मंत्र भगवान शिव के प्रलयंकारी रूप का आह्वान कर साधक को जीवन की सबसे विकट बाधाओं से मुक्त कर विजय सुनिश्चित…