पशुपतास्त्र (मूल) सिद्ध मंत्र
ॐ श्लीं पशु हुं फट्
यह ब्रह्मांड का सबसे प्रलयंकारी और अनियंत्रित अस्त्र मंत्र है 62। इसका उपयोग केवल चरम परिस्थितियों में होता है। यह मारण, उच्चाटन, और महाशत्रुओं के पूर्ण विनाश के लिए है। यह हर प्रकार के काले जादू को भ
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
यह ब्रह्मांड का सबसे प्रलयंकारी और अनियंत्रित अस्त्र मंत्र है 62। इसका उपयोग केवल चरम परिस्थितियों में होता है। यह मारण, उच्चाटन, और महाशत्रुओं के पूर्ण विनाश के लिए है। यह हर प्रकार के काले जादू को भस्म कर देता है 58।
इस मंत्र से क्या होगा?
यह ब्रह्मांड का सबसे प्रलयंकारी और अनियंत्रित अस्त्र मंत्र है 62
इसका उपयोग केवल चरम परिस्थितियों में होता है
यह मारण, उच्चाटन, और महाशत्रुओं के पूर्ण विनाश के लिए है
यह हर प्रकार के काले जादू को भस्म कर देता है
जाप विधि
६ लाख जप द्वारा पुरश्चरण संपन्न किया जाता है 58। इसका दशांश (६०,०००) हवन, तर्पण और मार्जन आवश्यक है 61। विशिष्ट पशुपत अस्त्र माला और यन्त्र का उपयोग किया जाता है 62।
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ।
mool mantraॐ ऐं ऐं मनो वाञ्छित सिद्धये ऐं ऐं ॐ
sabar mantraॐ नमो आदेश गुरु का आदेश काली काली महाकाली इन्द्र की बेटी ब्रम्हा की साली चाम की गठरी हाड़ की माला भजो आनन्द सुंदरी बाला। भरपूर वसन करले उठाई काम क्रन्ति कलिका आई लुच्ची मोहन भोग भेट कड़ाही जहा भेजा वहा जाई कष्ट दुखो से लेव बचाई सभी देत्यन को मार भगाई आदि अंत तू रही सहाई में पूत तू मेरी माई सब दुखन से लेव बचाई गुरु की शक्ति हमारी भक्ति फुरे मंत्र दोहाई काली की ईश्वरो वाचा 12
ugra mantraॐ हूं स्फारय-स्फारय, मारय-मारय, शत्रु-वर्गान् नाशय-नाशय स्वाहा
naam mantraहरि
dhyan mantraॐ असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्मा अमृतं गमय। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥