दक्षिणा काली महाविद्या सिद्ध मंत्र
ॐ क्रीं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं हूं हूं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं हूं हूं स्वाहा ॥
इस महारानी (Queen of Mantras) सिद्धि मंत्र का मुख्य प्रयोजन धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति है 15। यह साधक के अहंकार (Ahamkara) का पूर्ण विनाश कर उसे शिव-तत्त्व और अनंत चेतना (P
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
इस महारानी (Queen of Mantras) सिद्धि मंत्र का मुख्य प्रयोजन धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति है 15। यह साधक के अहंकार (Ahamkara) का पूर्ण विनाश कर उसे शिव-तत्त्व और अनंत चेतना (Pure consciousness) का साक्षात्कार कराता है 12। यह मंत्र षट्कर्म सिद्धि प्रदान करता है, कुण्डलिनी ऊर्जा को जाग्रत करता है, और साधक को अकाल मृत्यु एवं काल (समय) के प्रभाव से मुक्त कर निर्वाण की ओर ले जाता है 12।
इस मंत्र से क्या होगा?
इस महारानी (Queen of Mantras) सिद्धि मंत्र का मुख्य प्रयोजन धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति है 15
यह साधक के अहंकार (Ahamkara) का पूर्ण विनाश कर उसे शिव-तत्त्व और अनंत चेतना (Pure consciousness) का साक्षात्कार कराता है 12
यह मंत्र षट्कर्म सिद्धि प्रदान करता है, कुण्डलिनी ऊर्जा को जाग्रत करता है, और साधक को अकाल मृत्यु एवं काल (समय) के प्रभाव से मुक्त कर निर्वाण की ओर ले जाता है
जाप विधि
एक लाख जप की पुरश्चरण विधि अनिवार्य है 12। इस २२ अक्षरी (Dvāviṁsākṣarī) विद्या-राज्ञी मंत्र का जप तांत्रिक विधान—कादि या हादि क्रम (Krīṁ अथवा Hrīṁ बीज)—के अंतर्गत किया जाता है 12। गुरु दीक्षा के बिना यह साधना वर्जित है; अत्यंत विशेष परिस्थिति में केवल दीपावली की रात या पूर्ण चंद्र ग्रहण के समय नदी तट पर जप किया जा सकता है 15। साधना में ऋष्यादि न्यास (भैरव ऋषि, उष्णिक् छन्द), कर न्यास, हृदयादि न्यास और पञ्चपूजा (लं, हं, यं, रं, वं बीजों के साथ) सम्मिलित हैं 12। जप से पूर्व शापविमोचन मंत्र का उच्चारण आवश्यक है और अंत में 'गुह्याति गुह्य गोप्त्री...' श्लोक से समर्पण किया जाता है 12।
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mool mantraश्री राम जय राम कोदण्ड राम
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sabar mantraओम ह्रीम नजर उतरजा कुरु कुरु स्वाहा 26