श्मशान भैरवी सिद्ध मंत्र
श्मशान भैरवि नररुधिरास्थि - वसाभक्षिणि सिद्धिं मे देहि मम मनोरथान् पूरय हुं फट् स्वाहा ॥
किसी भी असंभव मनोकामना की तत्काल पूर्ति, अत्यंत उग्र और गुप्त तांत्रिक सिद्धियों की प्राप्ति, और मारण/उच्चाटन जैसी शक्तियों का जागरण 35। यह साधक को तंत्र के सर्वोच्च रहस्यों से अवगत कराकर भौतिक सीमाओं
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
किसी भी असंभव मनोकामना की तत्काल पूर्ति, अत्यंत उग्र और गुप्त तांत्रिक सिद्धियों की प्राप्ति, और मारण/उच्चाटन जैसी शक्तियों का जागरण 35। यह साधक को तंत्र के सर्वोच्च रहस्यों से अवगत कराकर भौतिक सीमाओं से परे ले जाता है।
इस मंत्र से क्या होगा?
किसी भी असंभव मनोकामना की तत्काल पूर्ति, अत्यंत उग्र और गुप्त तांत्रिक सिद्धियों की प्राप्ति, और मारण/उच्चाटन जैसी शक्तियों का जागरण 35
यह साधक को तंत्र के सर्वोच्च रहस्यों से अवगत कराकर भौतिक सीमाओं से परे ले जाता है
जाप विधि
यह एक अत्यंत उग्र तांत्रिक साधना है जो श्मशान या अत्यंत एकांत स्थल पर योग्य तांत्रिक गुरु के सान्निध्य में ही की जाती है 35। इसमें विशिष्ट उग्र कर्मों और बलि विधानों का पालन किया जाता है।
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
इन्द्रं वयं महाधन इन्द्रमर्भे हवामहे। युजं वृत्रेषु वज्रिणम्॥
ugra mantraॐ लां लाकिन्यै नमः
sabar mantraराम कुण्डली, ब्रह्मचाक । तेतीस कोटि देवा देवा अमुक की बेड़ियां । अमुकेर अंकेर बाण काटम्। शर काटम् । संधान काटम् । कुज्ञान काटम् । कारवणे काटे । राजा रामचन्द्रेर आज्ञा । राजा रामचन्द्ररे ऐई झण्डी अमुकेर अंगे शीघ्र लागूगे 25
naam mantraराधे राधे
shanti mantraॐ वाङ् मे मनसि प्रतिष्ठिता । मनो मे वाचि प्रतिष्ठितम् । आविरावीर्म एधि । वेदस्य म आणीस्थः । श्रुतं मे मा प्रहासीः । अनेनाधीतेनाहोरात्रान्सन्दधामि । ऋतं वदिष्यामि । सत्यं वदिष्यामि । तन्मामवतु । तद्वक्तारमवतु । अवतु माम् । अवतु वक्तारम् । अवतु वक्तारम् ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
dhyan mantraॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥