उच्छिष्ट गणपति (कर न्यास अस्त्र मंत्र) तांत्रिक तांत्रिक मंत्र
ॐ हस्ति पिशाचि लिखे स्वाहा अस्त्राय फट्
तंत्र साधना के दौरान उत्पन्न होने वाले विघ्नों का समूल नाश और अदृश्य बाधाओं को छिन्न-भिन्न करना 76। निष्कर्ष सनातन तांत्रिक परंपरा का उपर्युक्त शास्त्र-आधारित विश्लेषण यह पूर्णतः स्पष्ट करता है कि तंत
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
तंत्र साधना के दौरान उत्पन्न होने वाले विघ्नों का समूल नाश और अदृश्य बाधाओं को छिन्न-भिन्न करना 76। निष्कर्ष सनातन तांत्रिक परंपरा का उपर्युक्त शास्त्र-आधारित विश्लेषण यह पूर्णतः स्पष्ट करता है कि तंत्र वाङ्मय (चाहे वह शाक्त आगम हो, शैव तंत्र हो या पाञ्चरात्र संहिता) मात्र अमूर्त दार्शनिक चिंतन का विषय नहीं है, अपितु ब्रह्मांडीय ऊर्जाओं को नियंत्रित और निर्देशित करने का एक अत्यंत प्रयोगात्मक और वैज्ञानिक शास्त्र है। मंत्रों में निहित बीज अक्षर (जैसे— ह्रीं, क्लीं, श्रीं, क्षं, फट्, ग्लौं) ध्वनि-विज्ञान (Cymatics) और नाद-योग के सर्वोच्च स्तर का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो साधक की चेतना में सीधे हस्तक्षेप कर भौतिक और पराभौतिक दोनों स्तरों पर अचूक परिणाम उत्पन्न करते हैं 1। इस संकलन में प्रस्तुत सभी तांत्रिक मंत्रों का संचयन विशुद्ध रूप से तंत्रसार, मंत्र महोदधि, रुद्रयामल तंत्र, अहिर्बुध्न्य संहिता और मेरु तंत्र जैसे प्रामाणिक ग्रंथों पर आधारित है। इन मंत्रों को स्तोत्रों या नाम-जप से पृथक रखने का मुख्य कारण इनकी तांत्रिक संरचना और मारक/सिद्धि प्रदाता प्रकृति है। मंत्र साधना में विधि (अनुष्ठान, दिशा, माला, और काल) का उतना ही महत्व है जितना स्वयं मंत्र का; अतः इन उग्र और सौम्य तांत्रिक साधनाओं की सफलता साधक की एकाग्रता, शास्त्रोक्त नियमों के पालन, सटीक न्यास प्रक्रिया और गुरु-परंपरा के निर्वहन पर पूर्णतः निर्भर करती है।
इस मंत्र से क्या होगा?
तंत्र साधना के दौरान उत्पन्न होने वाले विघ्नों का समूल नाश और अदृश्य बाधाओं को छिन्न-भिन्न करना 76
निष्कर्ष सनातन तांत्रिक परंपरा का उपर्युक्त शास्त्र-आधारित विश्लेषण यह पूर्णतः स्पष्ट करता है कि तंत्र वाङ्मय (चाहे वह शाक्त आगम हो, शैव तंत्र हो या पाञ्चरात्र संहिता) मात्र अमूर्त दार्शनिक चिंतन का विषय नहीं है, अपितु ब्रह्मांडीय ऊर्जाओं को नियंत्रित और निर्देशित करने का एक अत्यंत प्रयोगात्मक और वैज्ञानिक शास्त्र है
मंत्रों में निहित बीज अक्षर (जैसे— ह्रीं, क्लीं, श्रीं, क्षं, फट्, ग्लौं) ध्वनि-विज्ञान (Cymatics) और नाद-योग के सर्वोच्च स्तर का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो साधक की चेतना में सीधे हस्तक्षेप कर भौतिक और पराभौतिक दोनों स्तरों पर अचूक परिणाम उत्पन्न करते हैं 1
इस संकलन में प्रस्तुत सभी तांत्रिक मंत्रों का संचयन विशुद्ध रूप से तंत्रसार, मंत्र महोदधि, रुद्रयामल तंत्र, अहिर्बुध्न्य संहिता और मेरु तंत्र जैसे प्रामाणिक ग्रंथों पर आधारित है
जाप विधि
बायें हाथ की हथेली को खोलकर दायें हाथ की तर्जनी और मध्यमा अंगुली से तीन बार आघात करते हुए इस अस्त्र मंत्र का उच्चारण किया जाता है 76।
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सकलायुध सम्पूर्ण निखिलाङ्ग सुदर्शन यदम कवच दिव्यम परमानंद दायिनं सौदर्शन यो सदा शुद्ध पठे नरह तस्या सिद्धि विपुला करस्था भवति ध्रुवं कोष्माण्ड चण्ड भूता ये दुष्टा ग्रहा स्मृता पलायन्ते निशंभीता वर्मनोस्य प्रभावतः कुष्ठा पस्मा गुलमा व्याध कर्म हेतुका नश्य तन मंत्रिता भूपाना सप्त दिनावधी अनेन मन्त्रिता मृतानां तुलसी मूल संस्थितां ललाटे तिलकं कृत्वा मोहये त्रिजगन्नरः। 17
navgrah mantraॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरूवे नमः॥
naam mantraसोम
shanti mantraॐ सर्वेषां स्वस्तिर्भवतु । सर्वेषां शान्तिर्भवतु । सर्वेषां पूर्णं भवतु । सर्वेषां मङ्गलं भवतु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
vaidik mantraॐ भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवा भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः । स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवांसस्तनूभिर्व्यशेमहि देवहितं यदायुः ॥
bhakti mantraश्री कृष्णः शरणं मम