ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
मंगल

मंगल नवग्रह मंत्र

ॐ लोहिताक्षाय विद्महे भूलाभाय धीमहि तन्नोऽङ्गारकः प्रचोदयात्।

भूमि, भवन और रियल एस्टेट से संबंधित कार्यों में असीम लाभ, तथा रुकी हुई पैतृक संपत्ति की प्राप्ति हेतु। 16

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारनवग्रह मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

भूमि, भवन और रियल एस्टेट से संबंधित कार्यों में असीम लाभ, तथा रुकी हुई पैतृक संपत्ति की प्राप्ति हेतु। 16

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

भूमि, भवन और रियल एस्टेट से संबंधित कार्यों में असीम लाभ, तथा रुकी हुई पैतृक संपत्ति की प्राप्ति हेतु

जाप विधि

नित्य मंगल की होरा में एक सौ आठ बार मूंगा माला से जप। 16

विशेष टिप्पणियाँ

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क्रीं कालिकायै स्वाहा मम नाभिं सदावतु ॥ ह्रीं कालिकायै स्वाहा मम पृष्ठं सदावतु । रक्तबीजविनाशिन्यै स्वाहा हस्तौ सदावतु ॥ नीलुत्वल दलश्यामा शत्रु संघ विदारणी नरमुंड तथा खगम कमलम च वरम तथा निर्भयाम रक्त बदनाम दस्ताली घोर रूपणी शवासनताम काली मुंडमाला विभूषिताम सर्वाङ्गं पातु मे देवी सर्व संपत् करे शुभे सर्व देव स्तु ते देवी कालिके तवाम नमाम यहम 23

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राम कुण्डली, ब्रह्मचाक । तेतीस कोटि देवा देवा अमुक की बेड़ियां । अमुकेर अंकेर बाण काटम्। शर काटम् । संधान काटम् । कुज्ञान काटम् । कारवणे काटे । राजा रामचन्द्रेर आज्ञा । राजा रामचन्द्ररे ऐई झण्डी अमुकेर अंगे शीघ्र लागूगे 25