उग्र नृसिंह तांत्रिक तांत्रिक मंत्र
ॐ नमो भगवते महानृसिंहाय सिंहाय सिंहमुखाय विकटाय वज्रनखाय मां रक्ष रक्ष ममशरीरं नखशिखापर्यन्तं रक्ष रक्ष कुरु कुरु मदीयं शरीरं वज्राङ्गम् कुरु कुरु परयन्त्र परमन्त्र परतन्त्राणां क्षिणु क्षिणु स्तम्भय स्तम्भय स्वाहा
अकाल मृत्यु का भय दूर करना, घोर असाध्य रोगों से मुक्ति और तांत्रिक शत्रुओं का पूर्ण स्तंभन 62।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
अकाल मृत्यु का भय दूर करना, घोर असाध्य रोगों से मुक्ति और तांत्रिक शत्रुओं का पूर्ण स्तंभन 62।
इस मंत्र से क्या होगा?
अकाल मृत्यु का भय दूर करना, घोर असाध्य रोगों से मुक्ति और तांत्रिक शत्रुओं का पूर्ण स्तंभन
जाप विधि
त्रिकाल संध्या या विशेषकर सूर्यास्त के समय बीजमंत्रों, अंग-न्यास और कर-न्यास के साथ जप। यह मंत्रराज पद स्तोत्र के अंगभूत है 62।
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ॐ सहस्रार हुं फट्
kavach mantraनासां वैवस्वत: पातु मुखं मे भास्कर: सदा । नाभिं गृहपति: पातु मन्द: पातु कटिं तथा । पदौ मन्दगति: पातु सर्वांग पातु पिप्पल: । आंगो पांगानी सर्वानी रक्षे में सूर्य नंदन इत्तेत कवच देव पठे सूर्य सुतस्य यह नतस्य जायते पीडा प्रीतो भवति सूर्य जह व्यय जन्म द्वितीय मृत्यु स्थान गतो पिवा कलस्थो गतो वापी सुप्रीतु सदाशनी अष्टमस्थे सूर्यसुते व्यये जन्म द्वितीयगे। कवचं पठते नित्यं न पीडा जायते क्वचित्। इत्य तत कवचम दिव्यम सौरे निर्मित पुरा जन्म लग्न स्थिता दोषा सर्वान नाश्यते प्रभु इति शनि कवच संपूर्णं ॥ 20
naam mantraरामदूत
kaamya mantraरक्षांसि यत्रोग्रविषाश्च नागा यत्रारयो दस्युबलानि यत्र। दावानलो यत्र तथाब्धिमध्ये तत्र स्थिता त्वं परिपासि विश्वम्॥
bhakti mantraॐ श्री हनुमते नमः
navgrah mantraॐ अश्वध्वजाय विद्महे पाशहस्ताय धीमहि तन्नः सूर्यः प्रचोदयात्।