ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
उग्र नृसिंह तांत्रिक

उग्र नृसिंह तांत्रिक तांत्रिक मंत्र

ॐ नमो भगवते महानृसिंहाय सिंहाय सिंहमुखाय विकटाय वज्रनखाय मां रक्ष रक्ष ममशरीरं नखशिखापर्यन्तं रक्ष रक्ष कुरु कुरु मदीयं शरीरं वज्राङ्गम् कुरु कुरु परयन्त्र परमन्त्र परतन्त्राणां क्षिणु क्षिणु स्तम्भय स्तम्भय स्वाहा

अकाल मृत्यु का भय दूर करना, घोर असाध्य रोगों से मुक्ति और तांत्रिक शत्रुओं का पूर्ण स्तंभन 62।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

जप काउंटर लोड हो रहा है...

प्रकारतांत्रिक मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

अकाल मृत्यु का भय दूर करना, घोर असाध्य रोगों से मुक्ति और तांत्रिक शत्रुओं का पूर्ण स्तंभन 62।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

अकाल मृत्यु का भय दूर करना, घोर असाध्य रोगों से मुक्ति और तांत्रिक शत्रुओं का पूर्ण स्तंभन

जाप विधि

त्रिकाल संध्या या विशेषकर सूर्यास्त के समय बीजमंत्रों, अंग-न्यास और कर-न्यास के साथ जप। यह मंत्रराज पद स्तोत्र के अंगभूत है 62।

विशेष टिप्पणियाँ

इसे भी पढ़ें

अलग-अलग श्रेणियों से

हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें

vaidik mantra

ॐ सुषारथिरश्वानिव यन्मनुष्यान्नेनीयतेऽभीशुभिर्वाजिन इव । हृत्प्रतिष्ठं यदजिरं जविष्ठं तन्मे मनः शिवसंकल्पमस्तु ।।

shanti mantra

ॐ भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवाः । भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः । स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवागँसस्तनूभिः । व्यशेम देवहितं यदायूः । स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः । स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः । स्वस्ति नस्ताक्षर्यो अरिष्टनेमिः । स्वस्ति नो वृहस्पतिर्दधातु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

kavach mantra

पातु श्रवणे वासरेश्वर घ्राणं धर्म पातु पदन वेदवाहन जीवा मानद पातु कंठ में सुरवंदित स्कंद प्रभाकर पातु वक्ष पातु जन प्रिय पातु पाद द्वादशात्मा सर्व सर्वांग सकलेश्वर यक्ष गन्धर्व राक्षसाः ब्रह्मराक्षस वेतालाः क्षमा दूरा देव पलायंते तस्य संकीर्तना अज्ञात कवच दिव्य यो जपे सूर्य मंत्रम् सिद्धि जायते तस्य कल्पकोटि शतैरपि। इति श्री ब्रह्मयामले त्रैलोक्य मंगलम नाम सूर्य कवचम संपूर्णम। 15

beej mantra

हं

ugra mantra

उच्छिष्ट चांडालिनी सुमुखी देवी महापिशाचिनी ह्रीं ठः ठः ठः

bhakti mantra

श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारे, हे नाथ नारायण वासुदेव