मातंगी तांत्रिक तांत्रिक मंत्र
ॐ ह्रीं क्लीं हूं मातंग्यै फट् स्वाहा
जीवन के विघ्नों का उग्र शमन, अज्ञान का नाश, तंत्र बाधा निवारण और परम वाक्-सिद्धि की प्राप्ति 36।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
जीवन के विघ्नों का उग्र शमन, अज्ञान का नाश, तंत्र बाधा निवारण और परम वाक्-सिद्धि की प्राप्ति 36।
इस मंत्र से क्या होगा?
जीवन के विघ्नों का उग्र शमन, अज्ञान का नाश, तंत्र बाधा निवारण और परम वाक्-सिद्धि की प्राप्ति
जाप विधि
देवी के हरे रंग के आभामंडल का मानसिक ध्यान करते हुए नित्य एकांत में जप करें। यह उच्छिष्ट चांडालिनी स्वरूप का मंत्र है, अतः मानसिक एकाग्रता आवश्यक है 36।
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सः
kavach mantraपातु श्रवणे वासरेश्वर घ्राणं धर्म पातु पदन वेदवाहन जीवा मानद पातु कंठ में सुरवंदित स्कंद प्रभाकर पातु वक्ष पातु जन प्रिय पातु पाद द्वादशात्मा सर्व सर्वांग सकलेश्वर यक्ष गन्धर्व राक्षसाः ब्रह्मराक्षस वेतालाः क्षमा दूरा देव पलायंते तस्य संकीर्तना अज्ञात कवच दिव्य यो जपे सूर्य मंत्रम् सिद्धि जायते तस्य कल्पकोटि शतैरपि। इति श्री ब्रह्मयामले त्रैलोक्य मंगलम नाम सूर्य कवचम संपूर्णम। 15
dhyan mantraकस्तूरीतिलकं ललाटपटले वक्षःस्थले कौस्तुभं नासाग्रे नवमौक्तिकं करतले वेणुं करे कङ्कणम्। सर्वाङ्गे हरिचन्दनं सुललितं कण्ठे च मुक्तावलिं गोपस्त्रीपरिवेष्टितो विजयते गोपालचूडामणिः॥
ugra mantraॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे
jap mantraॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः
mool mantraॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः (सामान्य मूल: ॐ भौमाय नमः)