सूर्य नवग्रह मंत्र
ॐ भास्कराय विद्महे महद्द्युतिकराय धीमहि तन्नः सूर्यः प्रचोदयात्।
बौद्धिक जड़ता का नाश करने, नेत्र ज्योति में सुधार, हड्डियों के रोगों से मुक्ति और सूर्य के प्रकाश के समान यश एवं कीर्ति को दसों दिशाओं में फैलाने हेतु। 16
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
बौद्धिक जड़ता का नाश करने, नेत्र ज्योति में सुधार, हड्डियों के रोगों से मुक्ति और सूर्य के प्रकाश के समान यश एवं कीर्ति को दसों दिशाओं में फैलाने हेतु। 16
इस मंत्र से क्या होगा?
बौद्धिक जड़ता का नाश करने, नेत्र ज्योति में सुधार, हड्डियों के रोगों से मुक्ति और सूर्य के प्रकाश के समान यश एवं कीर्ति को दसों दिशाओं में फैलाने हेतु
जाप विधि
रविवार से प्रारंभ कर नित्य प्रातः काल कुशा के आसन पर बैठकर पूर्व दिशा की ओर मुख करके एक सौ आठ बार रुद्राक्ष माला से जप करें। 16
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजम्बूफलचारुभक्षणम्। उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपङ्कजम्॥
beej mantraबं, भं, मं, यं, लं, रं
sabar mantraओम नमो आदेश गुरु जी को आदेश पहला गण गणपति 14 विद्या सारथी जति सती कैलाशपति बल भीम मारुती आले विघ्न निवारी साईं गोरखनाथ की दुआही गुरु की शक्ति मेरी भक्ति चले मंत्र ईश्वरी वाचा पिंड कच्चा गुरु गोरखनाथ का शब्द सच्चा 24
kavach mantraक्रीं कालिकायै स्वाहा मम नाभिं सदावतु ॥ ह्रीं कालिकायै स्वाहा मम पृष्ठं सदावतु । रक्तबीजविनाशिन्यै स्वाहा हस्तौ सदावतु ॥ नीलुत्वल दलश्यामा शत्रु संघ विदारणी नरमुंड तथा खगम कमलम च वरम तथा निर्भयाम रक्त बदनाम दस्ताली घोर रूपणी शवासनताम काली मुंडमाला विभूषिताम सर्वाङ्गं पातु मे देवी सर्व संपत् करे शुभे सर्व देव स्तु ते देवी कालिके तवाम नमाम यहम 23
kaamya mantraनतेभ्यः सर्वदा भक्त्या चण्डिके दुरितापहे। रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥
jap mantraॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः