मातृका देवी / वर्णेश्वरी (स्वाधिष्ठान चक्र की पंखुड़ियाँ) बीज बीज मंत्र
बं, भं, मं, यं, लं, रं
जल तत्व की शक्तियों का परिशोधन और रचनात्मक ऊर्जाओं का परम विस्फोट 3।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
जल तत्व की शक्तियों का परिशोधन और रचनात्मक ऊर्जाओं का परम विस्फोट 3।
इस मंत्र से क्या होगा?
जल तत्व की शक्तियों का परिशोधन और रचनात्मक ऊर्जाओं का परम विस्फोट
जाप विधि
स्वाधिष्ठान चक्र की छह पंखुड़ियों पर ध्यान लगाते हुए जप 2।
विशेष टिप्पणियाँ
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ॐ ह्रीं हूं हां ग्रें क्षों क्रों नमः॥
siddh mantraश्मशान भैरवि नररुधिरास्थि - वसाभक्षिणि सिद्धिं मे देहि मम मनोरथान् पूरय हुं फट् स्वाहा ॥
ugra mantraउच्छिष्ट चांडालिनी सुमुखी देवी महापिशाचिनी ह्रीं ठः ठः ठः
vaidik mantraॐ समुद्रादर्णवादधि संवत्सरो अजायत । अहोरात्राणि विदधद् विश्वस्य मिषतो वशी ॥
stotra mantraस वै न देवासुरमर्त्यतिर्यंग न स्त्री न षण्डो न पुमान न जन्तुः । नायं गुणः कर्म न सन्न चासन निषेधशेषो जयतादशेषः ॥ 4
navgrah mantraॐ सौम्यरूपाय विद्महे बाणेशाय धीमहि तन्नो बुधः प्रचोदयात्।