मातृका देवी / वर्णेश्वरी (स्वाधिष्ठान चक्र की पंखुड़ियाँ) बीज बीज मंत्र
बं, भं, मं, यं, लं, रं
जल तत्व की शक्तियों का परिशोधन और रचनात्मक ऊर्जाओं का परम विस्फोट 3।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
जल तत्व की शक्तियों का परिशोधन और रचनात्मक ऊर्जाओं का परम विस्फोट 3।
इस मंत्र से क्या होगा?
जल तत्व की शक्तियों का परिशोधन और रचनात्मक ऊर्जाओं का परम विस्फोट
जाप विधि
स्वाधिष्ठान चक्र की छह पंखुड़ियों पर ध्यान लगाते हुए जप 2।
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ॐ वं वशितायै नमः स्वाहा ।
ugra mantraअं ङं ञं णं नं मं
dhyan mantraध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपद्मासनस्थं पीतं वासो वसानं नवकमलदलस्पर्धिनेत्रं प्रसन्नम्। वामाङ्कारूढ सीतामुखकमलमिलल्लोचनं नीरदाभं नानालङ्कारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डनं रामचन्द्रम्॥
sabar mantraक्रिम कामाख्या माई निज भैरव के संग आई देवे मनोवांछित सिद्धि पूरे सब कामना लेवे अडहुल का फूल सब स्त्री तोरा रूप मनसा पूरो माई तो शंकर की दुहाई क्रिंग क्रिंग क्रीम 18
navgrah mantraनीलांजन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्। छायामार्तंड सम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्॥
bhakti mantraॐ भास्कराय नमः