मातृका देवी / वर्णेश्वरी (स्वाधिष्ठान चक्र की पंखुड़ियाँ) बीज बीज मंत्र
बं, भं, मं, यं, लं, रं
जल तत्व की शक्तियों का परिशोधन और रचनात्मक ऊर्जाओं का परम विस्फोट 3।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
जल तत्व की शक्तियों का परिशोधन और रचनात्मक ऊर्जाओं का परम विस्फोट 3।
इस मंत्र से क्या होगा?
जल तत्व की शक्तियों का परिशोधन और रचनात्मक ऊर्जाओं का परम विस्फोट
जाप विधि
स्वाधिष्ठान चक्र की छह पंखुड़ियों पर ध्यान लगाते हुए जप 2।
विशेष टिप्पणियाँ
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न विद्यते यस्य न जन्म कर्म वा न नाम रूपे गुणदोष एव वा । तथापि लोकाप्ययसम्भवाय यः स्वमायया तान्यनुकालमृच्छति ॥ 4
sabar mantraझाड़ि झाड़ि कापड़ पिन्दि । वीर मुष्टे बांधि बाल । बुले एलाम मशान भूम होते भैरव। कटार हाते। लोहार बाड़ी। बाम हाते चामदड़ि। आज्ञा दिल राजा चुडं हाते । लोहार किला । मुद्गर धिनि। विगलि घुंडिकार आज्ञे 25
shanti mantraॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः । सर्वे सन्तु निरामयाः । सर्वे भद्राणि पश्यन्तु । मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत् ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
ugra mantraॐ ऐं ह्रीं क्लीं प्रत्यंगिरे सर्वदुष्टान प्राचं छिन्धि छिन्धि
dhyan mantraॐ सह नाववतु। सह नौ भुनक्तु। सह वीर्यं करवावहै। तेजस्वि नावधीतमस्तु मा विद्विषावहै। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
jap mantraॐ दाम् दत्तात्रेयाय स्वाहा