मातृका देवी / वर्णेश्वरी (स्वाधिष्ठान चक्र की पंखुड़ियाँ) बीज बीज मंत्र
बं, भं, मं, यं, लं, रं
जल तत्व की शक्तियों का परिशोधन और रचनात्मक ऊर्जाओं का परम विस्फोट 3।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
जल तत्व की शक्तियों का परिशोधन और रचनात्मक ऊर्जाओं का परम विस्फोट 3।
इस मंत्र से क्या होगा?
जल तत्व की शक्तियों का परिशोधन और रचनात्मक ऊर्जाओं का परम विस्फोट
जाप विधि
स्वाधिष्ठान चक्र की छह पंखुड़ियों पर ध्यान लगाते हुए जप 2।
विशेष टिप्पणियाँ
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श्वेताम्बरधरे देवि नानालङ्कारभूषिते । जगत्स्थिते जगन्मातर्महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥ 29
mool mantraॐ नमो भगवते वासुदेवाय
kavach mantraॐ यद्गुह्यं परमं लोके सर्वरक्षाकरं नृणाम्। यन्न कस्यचिदाख्यातं तन्मे ब्रूहि पितामह॥ अस्ति गुह्यतमं विप्र सर्वभूतोपकारकम्। देव्यास्तु कवचं पुण्यं तच्छृणुष्व महामुने॥ प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी। तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम्॥ पञ्चमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च। सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम्॥ नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गाः प्रकीर्तिताः। उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना॥ शाकिनी तथा अंतरिक्षचरा घोरा डाकिन्यश्च महाबलाय प्रभु तपिश न धीर वृषभ वृषभ लो कुष्मांडा ब्रॉदर यह नश्यंति दर्शनात्तस्य कवचे 9
naam mantraशुक्र
vaidik mantraॐ अग्निर्वृत्राणि जङ्घनत् द्रविणस्युर्विपन्यया । समिद्धः शुक्र आहुतः ॥
kaamya mantraॐ ह्रीं हूं हां ग्रें क्षों क्रों नमः॥