ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
भाववृत्त / अघमर्षण सूक्त (१०.१९०.२)

भाववृत्त / अघमर्षण सूक्त (१०.१९०.२) वैदिक मंत्र

ॐ समुद्रादर्णवादधि संवत्सरो अजायत । अहोरात्राणि विदधद् विश्वस्य मिषतो वशी ॥

काल-चक्र के नकारात्मक प्रभाव से मुक्ति एवं मानसिक विकारों का स्थायी शमन।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारवैदिक मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

काल-चक्र के नकारात्मक प्रभाव से मुक्ति एवं मानसिक विकारों का स्थायी शमन।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

काल-चक्र के नकारात्मक प्रभाव से मुक्ति एवं मानसिक विकारों का स्थायी शमन

जाप विधि

अघमर्षण प्रक्रिया के अंतर्गत श्वास रोककर (कुम्भक अवस्था में) पूर्ण एकाग्रता के साथ मानसिक जप।

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