भाववृत्त / अघमर्षण सूक्त (१०.१९०.२) वैदिक मंत्र
ॐ समुद्रादर्णवादधि संवत्सरो अजायत । अहोरात्राणि विदधद् विश्वस्य मिषतो वशी ॥
काल-चक्र के नकारात्मक प्रभाव से मुक्ति एवं मानसिक विकारों का स्थायी शमन।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
काल-चक्र के नकारात्मक प्रभाव से मुक्ति एवं मानसिक विकारों का स्थायी शमन।
इस मंत्र से क्या होगा?
काल-चक्र के नकारात्मक प्रभाव से मुक्ति एवं मानसिक विकारों का स्थायी शमन
जाप विधि
अघमर्षण प्रक्रिया के अंतर्गत श्वास रोककर (कुम्भक अवस्था में) पूर्ण एकाग्रता के साथ मानसिक जप।
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
ॐ धूम्र लोचनी उग्र रूपिनी सकल विष्छेदिनी सकल विष संचय नाशय नाशय मारय मारय विषमज्वर ताप ज्वर शीत ज्वर वात ज्वर लूत ज्वर पयत्य ज्वर श्लेष्म ज्वर मोह ज्वर संदीपात ज्वर प्रेत ज्वर पिशाच ज्वर कृत्रिम ज्वर सकल रोग निवारिणी सकल ग्रह छेदिनी धूं धूं धूं धूं धूं धूमावती माम रक्षा रक्ष शीघ्रम शीघ्रमाच्छा गच्छ क्षिप्रमेव आरोग्यम कुरु कुरु हुम फट धूम धूम धूमावती स्वाहा
ugra mantraॐ ह्रीं ऐं भगवती मतंगेश्वरी श्रीं स्वाहा:
kavach mantraपातु श्रवणे वासरेश्वर घ्राणं धर्म पातु पदन वेदवाहन जीवा मानद पातु कंठ में सुरवंदित स्कंद प्रभाकर पातु वक्ष पातु जन प्रिय पातु पाद द्वादशात्मा सर्व सर्वांग सकलेश्वर यक्ष गन्धर्व राक्षसाः ब्रह्मराक्षस वेतालाः क्षमा दूरा देव पलायंते तस्य संकीर्तना अज्ञात कवच दिव्य यो जपे सूर्य मंत्रम् सिद्धि जायते तस्य कल्पकोटि शतैरपि। इति श्री ब्रह्मयामले त्रैलोक्य मंगलम नाम सूर्य कवचम संपूर्णम। 15
sabar mantraओम नमो आदेश गुरु को कामरूप कामाख्या माई अपनी शक्ति से अमुक मेरी इच्छा पूरी करो ना करो तो ईश्वर महादेव की दुहाई 19
gyan mantraॐ अर्हं मुखकमलवासिनी पापात्मक्षयंकारी वद वद वाग्वादिनी सरस्वती ऐं ह्रीं नमः स्वाहा ॥
bhakti mantraॐ गौरीशंकराय नमः