ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
भाववृत्त / अघमर्षण सूक्त (१०.१९०.१)

भाववृत्त / अघमर्षण सूक्त (१०.१९०.१) वैदिक मंत्र

ॐ ऋतञ्च सत्यं चाभीद्धात्तपसोऽध्यजायत । ततो रात्र्यजायत ततः समुद्रो अर्णवः ॥

बाह्य एवं आभ्यन्तर पापों का नाश, अन्तःकरण की शुद्धि एवं सार्वभौमिक सत्य से तादात्म्य।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारवैदिक मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

बाह्य एवं आभ्यन्तर पापों का नाश, अन्तःकरण की शुद्धि एवं सार्वभौमिक सत्य से तादात्म्य।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

बाह्य एवं आभ्यन्तर पापों का नाश, अन्तःकरण की शुद्धि एवं सार्वभौमिक सत्य से तादात्म्य

जाप विधि

दैनिक संध्या वंदन में आचमन एवं प्राणायाम के पश्चात् दाहिनी नासिका से श्वास लेते हुए मानसिक जप।

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